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Saturday, March 31, 2012

84 दंगों के दौरान पुलिस ने आंखें मूंदे रखी: CBI

 84 दंगों के दौरान पुलिस ने आंखें मूंदे रखी: CBI
आईएएनएस | नई दिल्ली, 31 मार्च 2012 |

 
कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा से सम्बंधित 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को बताया कि दंगों के समय पुलिस ने अपनी आंखें बंद कर ली थी.
मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील आर. एस. चीमा ने कहा, ‘यह ऐसा मामला था, जहां पुलिस ने पूर्व नियोजित तरीके से काम किया और सभी पुलिसकर्मियों ने अपनी आंखें मूंद ली थी.’
चीमा ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जे. आर. आर्यन को कहा कि दंगे से सम्बंधित 150 शिकायतें आई थी जिनमें से महज पांच ही मामले पुलिस द्वारा दर्ज किए गए.
उन्होंने अदालत को बताया कि जिन पुलिस अधिकारियों ने बतौर बचाव पक्ष के गवाह के रूप में अपने बयान दर्ज कराए हैं, उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि उन्होंने दंगों के दौरान कुछ नहीं देखा.
अदालत ने अभियोजक से सज्जन कुमार व पांच अन्य आरोपियों के खिलाफ ऐसा कोई प्रत्यक्ष सबूत दिखाने को कहा जिससे साबित हो कि उन्होंने सिखों के खिलाफ भीड़ को उकसाया हो.
इसके जवाब में अभियोजक ने कहा कि वह दो अप्रैल को होने वाली आगामी सुनवाई के दौरान कुछ मीडिया रिपोर्ट दिखाएंगे

1984 दंगा मामला: सज्जन कुमार का बयान दर्ज करेगी अदालत

साल 1984 के भीषण सिख दंगा मामले में मुकदमे का सामना कर रहे पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार के बयान को दिल्ली की एक अदालत सोमवार को दर्ज करेगी.
बाहरी दिल्ली के इस पूर्व सांसद के खिलाफ जस्टिस जीटी नानावती आयोग की सिफारिशों के बाद मामला दर्ज किया गया था. इसके बाद पिछले साल जनवरी महीने में सीबीआई ने सज्जन कुमार और अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था.
हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया के बाद सज्जन कुमार द्वारा उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायाल की शरण में जाने के कारण सुनवाई प्रक्रिया प्रभावित हो चुकी है लेकिन 20 सितंबर 2010 को जब उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई द्वारा सज्जन के खिलाफ दायर आपराधिक मामलों को खत्म करने संबंधी उनकी याचिका को खारिज कर दिया तो पूरी प्रक्रिया पटरी पर लौट आई.
इसके बाद निचली अदालत ने मई 2010 में सज्जन और पांच अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 395 (डकैती), 427 (संपत्ति को नुकसान पहुंचाना) और 153ए (विभिन्न समुदायों के बीच शत्रुता फैलाना) के तहत मामला दर्ज किया था.
दूसरी तरफ, सीबीआई ने सज्जन कुमार को हिंसा के दौरान सिख समुदाय के खिलाफ लोगों को भड़काने को दोषी ठहराया है.

सिख विरोधी दंगा: सज्जन कुमार की मुश्किलें बढ़ी

दिल्ली की एक अदालत ने 1984 के सिख विरोधी दंगे से जुड़े एक और मामले में वरिष्ठ कांग्रेस नेता सज्जन कुमार के विरूद्ध आपराधिक सुनवाई का मार्ग प्रशस्त कर उनके लिए एक नई परेशानी खड़ी कर दी है.
अदालत ने कुमार के खिलाफ पहले से चल रही एक मामले की सुनवाई के साथ नये मामले को जोड़ने की दिल्ली पुलिस की मांग खारिज कर दी.
जिला न्यायाधीश एस के सरवारिया ने विशेष जन अभियोजक के आवेदन को यह कहते हुए स्वीकार कर लिया कि 1992 में कुमार के खिलाफ तैयार आरोपपत्र को दूसरे मामले के साथ जोड़ा नहीं जा सकता है जिस पर सुनवाई पहले से जारी है.
सिख विरोधी दंगे के सिलसिले में 1992 में एक आरोप पत्र तैयार किया गया था जिसमें कुमार के खिलाफ सुनवाई के लिए पर्याप्त सबूत होने की बात कही गयी थी लेकिन इस आरोपपत्र को कभी भी न्यायाधीश के समक्ष अभियोजन के लिए नहीं लाया गया.
दिल्ली पुलिस का दावा था कि सिख विरोधी दंगे के दौरान की घटनाओं से जुड़े दोनों मामलो को अभियोजना शाखा के सुझाव पर जोड़े गए. अभियोजक ने कहा था कि पुलिस को मामलों को जोड़ने का अधिकार नहीं है और ऐसा केवल अदालत कर सकती है.

सिख दंगों के गवाह ने सज्जन कुमार और अन्य को पहचाना

1984 में राष्ट्रीय राजधानी में हुए सिख विरोधी दंगे में अपने परिवार के पांच सदस्यों को खोने वाले एक अहम गवाह ने अदालत में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन कुमार की उस व्यक्ति के तौर पर पहचान की, जिसने दंगे के दौरान भीड़ को उकसाया था. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुनीता गुप्ता की अदालत में बचाव पक्ष के वकील द्वारा जिरह के दौरान जगदीश कौर ने सज्जन के भतीजे बलवंत खोखर, गिरधारी लाल और कैप्टन भागमल की सहयोगियों के तौर पर पहचान की.
कौर का बयान पूरा होने के बाद बचाव पक्ष के वकील ने उनसे जिरह शुरू की. बचाव पक्ष के वकील ने समय-समय पर विभिन्न अधिकारियों के समक्ष दंगा पीड़ितों के बयान की कई असंगतियों को रेखांकित किया. हालांकि, कौर ने बयान में असंगति की बातों का खंडन किया. कौर ने कहा कि उन्होंने सभी अधिकारियों के समक्ष वही बयान दिया, चाहे वह नानावती आयोग हो, सीबीआई या पंजाब का मजिस्ट्रेट हो.
कौर ने कहा, ‘‘उन्होंने (अधिकारियों ने) कहा कि वे रिकार्ड में सिर्फ प्रासंगिक बयानों को दर्ज करेंगे.’’ गवाह का जिरह सोमवार को जारी रहेगा. कौर ने कल पुलिस पर 1984 में दंगाइयों का पक्ष लेने और दंगों के प्रति आंखें मूंद लेने का आरोप लगाया था. उन्होंने इस दंगे में अपने परिवार के पांच सदस्यों को खो दिया था.

IF MODI SIR IS CULPRIT......WHOLE CONGRESS CULPRIT....!
4000 MURDERS....In 1984......
अब १९८४ के बारे में बात करते है I जहा पर इंदिरा गांधीजी के हत्यारे शीख होने के कारन बेवजह डेल्ही के हजारो शीखो को मौत के घाट उतारा I इतना तो सही है लेकिन उसको जनता का रोष जताकर ठन्डे बसते में डालने की बात कांग्रेस कर रही है I और उनके जिम्मेदार नेता आज केंद्र में है I जिनको कोई सजा नहीं होगी I
कांग्रेस ही सही तौर पर भारत में असली कम्युनल पार्टी है जो दंगे फैलाती है I गुजरात में कांग्रेस के शाशन के दौरान कई दंगे हुए है I जिसमे कई हिन्दू मारे गए है और कई घर उजाड़ दिए गए थे I आज पश्चिम अहमदाबाद में बसने वाले किसी भी लोगो से पुचो आपको एक ही जवाब मिलेगा की क्प्नग्रेस के शाशन में कई दंगे हुए है और कई हिन्दू मरे गए है I
सच में कांग्रेस का दामन कई निर्दोशो के खून से लाल है I चाहे वोह शीख हो या कोई भी अपने झूठे सेक्युलारिस्म के लिए कई निर्दोशो को बलि का बकरा बना दिया और गाँधी की पार्टी और अहिंसा की पुजारी बता कर सत्ता का सुख ले रही है I बोफोर्स, शीख, भोपाल कांड ऐसे और कई खूंखार खुनी कांड है जो यह साफ़ करता है असली मौत के सौदागर कौन है कांग्रेस है या बीजेपी I
कई नेता कौभांड में शामिल है फिर भी आज भी खुर्शी पे चीपके हुए है I आप की अगुईवाली कई राज्य सरकारों के राज्य में किसान आत्महत्या कर रहा है, पीने को पानी नहीं, बीजली नहीं वैसा हल गुजरात में नहीं I यहाँ पानी एवम लाइट २४ घंटे मौजूद है और किसान भी खुशहाल है I आप ही ने अपने विदेश प्रेम के कारन क्वोत्रोची एवम एंडरसन को देश में से बाइज्जत बरी किया और हो भी क्यों न विदेशी ही तो कांग्रेस को चला रही है I इसलिए विदेश प्रेम जायज है I
अंत में किसी और को कुछ कहने से पहले अपने दमन में एक बात जाक लेने चाहिए कही वो दागी तो नहीं अगर है तो पहले उसे साफ़ करना चाहिए बाद में किसी और को बताना चाहिए I इसीलिए १९८४ भोपाल कांड, शीख कांड के बावजूद कांग्रेस बीजेपी को मौतकी सौदागर मानती है तो वोह क्या है ?
गोधरा में हुए २००२ के दंगो के लिए कांग्रेस एवम अन्य राजनीतिक पक्ष बीजेपी को और खास तौर पर नरेन्द्र मोदी को जिम्मेदार मान रही है I इस दंगो की शुरुआत गोधरा से हुई जहा साबरमती ट्रेन से लौट रहे रामसेवको को कुछ लोगो ने डब्बे में बांध करके जलादिया था I जो उस समय के रेलमंत्री लालू यादव ने कहा की आग अंदर से ही लगे गई थी I
मेरा उनसे एक प्रश्न यह है की कोई भी इन्सान इतना पागल तो नहीं होता की अपने आप को जिन्दा जला डाले I और ऐसे लोगो को जो ठीक से बोल भी नहीं पाते I उस समय वह का मंजर ऐसा था की कोई भी पत्थर दिल इन्सान सहम जाता I जो माजर था वो वाकई में इतना घिनोना था की जब भी उसकी याद आती है आज भी दिल काप उठता है I हमारी केंद्र सरकार को दंगो में मरे जाने वाले मुस्लिमो की चिंता है लेकिन ट्रेन में जो ५८ लोगो को जिन्दा जलाया उनका क्या?
झूठे सेकुलरिस्म के लिए वाकई में ऐसा अन्याय होना यह हम सेहन नहीं सर सकते I दोनों तरफ से लोग कसूरवार है अगर हिन्दू कसूरवार है तो मुस्लिम भी है क्यूंकि उन्होंने ही आग लगायी थी ट्रेन में अगर ट्रेन में आग नहीं लगी होती तो ऐसा नहीं होता I उस समय के गुजरात कांग्रेस नेता शंकरसिंह वाघेला की भी जाच होनी चाहिए क्यूंकि उस समय वोह भी खली भीथे थे और उनके पास चुनाव में कोई मुद्दा नहीं था और आग लगनेवाले में कांग्रेस का स्थानीय कोर्पोराते भी शामिल था I इसलिए गोधरा ट्रेन कांड की निष्पक्ष जांच फिर से होनी चाहिए और जो ट्रेन में जलकर मर गए है उनके परिवार को भी न्याय मिलना चाहिए I और दंगो में कांग्रेस की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए I

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