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Wednesday, October 10, 2012

कॉंग्रेस फेसबुक पर युवाओको रोजगार दे रही है !


दोस्तो आज एक चौंकाने वाली बात पता चली है ! कॉंग्रेस फेसबुक पर युवाओको रोजगार दे रही है ! अपनी योजना आयोग के आकडे 28 रु। निर्वाह प्रतिदिन से 3 गुना ! उनका समर्थन करने के लिए और मोदी और गुजरात सरकार को बदनाम करने के लिए !!!
तो आप भी अगर जुड़ना चाहते है तो जल्दी नजदीकी कॉंग्रेस कार्यालय का संपर्क करे ! लेकिन क्या दीन के 100-200 रुपये मे देश के गदारों के साथ हो जाएँगे ! जी हाँ ! कई ऐसे है ----हमारे भरूच - गुजरात से भी एक नमूना है --- जो बार-बार सीएनजी के भाव- बच्चो के गुम होने --- और उद्योगो की जमीन ....और नीचता की हद की....हरेन पन्ड्या केस मे उनको ब्रह्महत्या का जिम्मेदार बताकर ब्राहमीनो को भड़काने का काम कर रहा है ....तो मेरे जवाब है

▌►•अब उस होंशियार को आड़े हाथो लेना है जो सीएनजी दामो के लिए मोदी को जिम्मेदार बता रहा था ...... हाईकोर्ट का फैसला सुना...? आदेश देना पड़ा केंद्र को.... भट्टजी ब्राहमीण होने से सबकुछ जान लेते तो केंद्र और राज्य के सिस्टम्स और
कामकाज के अंतर को जाने बगैर भौक-भौंक कर क्यू गुजरात को और आपकी ही तरह सिर्फ उपरी ज्ञान वाले विशेषज्ञो को बढ़ावा दे रहे हो ! हमारे देश मे ऐसे अधूरे घड़े बड़ी समस्या है...हर कोई खुद को एक्सपर्ट समजता है....और बकवास करने लगते है !
सीएनजी क्या सिर्फ गुजरात मेमहंगा है ? जरा जवाब दे भारत मे सीएनजी के उत्पादन और मांग के आंकड़े क्या है ? बुद्धू यह भी नहीं जानते के खपत इतनी ज्यादा है की इम्पोर्ट करना पड़ता है ! तो भाव सभी जगह बढ़े है ! उसको पगार देनेवाली कॉंग्रेस की ही दिलही मे पिछले महीने 3 रु। से ज्यादा बढ़े थे !
 पूरे देश मे पेट्रो प्रोडक्ट्स पर सरचार्ज एक समान होना चाहिए .. केन्द्र सरकार को "law of equality" के नैसर्गिक सिद्धांत का पालन हर हाल मे करना चाहिए :- सुप्रीम कोर्ट
मित्रों, आज अगर न्यायपालिका जागरूक नही होती तो ये नीच कांग्रेस अपनी दोगली न

ीति से गैरकांग्रेसी राज्यों को बर्बाद कर देती |
सभी पेट्रो प्रोडक्ट्स जैसे डीजल, पेट्रोल, केरोसिन, और एलपीजी पर केन्द्र सरकार सरचार्ज वसूलती है | ये सरचार्ज वाजपेयी जी के राज मे कश्मीर से कन्याकुमारी तक सभी राज्यों मे एक समान था |

कहाँ गया वो अधूरा घड़ा --- गुजरात मे ही रहके गुजरात का गद्दार - जिगर भट्ट ( जो अपनी इज्जत को नहीं बचा पाया --वह बहुत चिल्ला रहा था सीएनजी के भावो पर ) सोचिए सीएनजी पूरे भारत मे सिर्फ गुजरात मे ही निकलता है और जो बाहर से आता है उसके लिए भी गुजरात सरकार ने भरूच के पास दहेज पर दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी टर्मिनल बनाया है जहां कतर से गैस आती है |
लेकिन कांग्रेस की केन्द्र सरकार ने गुजरात के साथ पिछले कई वर्षों से दोगलापन व्यहार कर रही थी ..केन्द्र सरकार दिल्ली को ३२ रूपये प्रति किलो के दर से सीएनजी देती है लेकिन गुजरात को वही गैस जो गुजरात की जमीन से ही निकला है उसे रूपये 49.80 प्रति किलो के भाव से देती है |
मजे की बात ये है की कांग्रेस आलाकमान के पाले हुए जमूरे और लबार जोकर गुजरात के कांग्रेस के नेता जैसे दुर्योधन झूठवाडिया, अशक्ति जाहिल, और हटेला और भागेला जैसे नमूने गुजरात मे सीएनजी के दाम को लेकर मोदी मोदी कहकर अपनी छाती कुटते रहते है |
इन नमूनों को ये नही दिखता था कि जब इनकी ही पार्टी कांग्रेस की केन्द्र सरकार गुजरात को दूसरे राज्यों से डेढ़ गुने दाम पर सीएनजी देती है तो गुजरात सरकार क्या करे ?
और जब इनसे केन्द्र सरकार के इस दोगलेपन के बारे मे पूछा जाता था तब ये नमूने या तो बात को टाल देते थे या कहते थे की गुजरात सरकार झूठ बोल रही है केन्द्र गुजरात को भी उसी दाम पर सीएनजी देता है |
मित्रों, केन्द्र की कांग्रेस सरकार के इसी दोगलेपन को लेकर गुजरात हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका दायर की गयी थी , जिसकी अंतिम सुनवाई कल खत्म हो गयी और फैसला भी आ गया |
चूँकि ये मामला गुजरात के ६ करोड लोगो के हितों से जुड़ा था और इसमें अन्याय करने वाला कोई और नही बल्कि भारत सरकार थी इसलिए इस अहम मुद्दे की सुनवाई खुद गुजरात हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भास्कर भट्टाचार्य और जस्टिस जे बी पारदीवाला की खण्डपीठ कर रही थी |
कल की सुनवाई पर केन्द्र की कांग्रेस सरकार के तरफ से पूरी ताकत लगा दी गई थी की गुजरात सरकार को महंगे दाम पर ही सीएनजी गैस दिया जाय जिसके गुजरात सरकार को बदनाम किया जा सके | केन्द्र सरकार की तरफ से असिस्टेंट सोलिसिटर जनरल पी एस चम्पनेरी के साथ बीस बड़े वकीलों की फ़ौज लगी थी |
लेकिन हाईकोर्ट ने आदेश दिया की कोई भी केन्द्र सरकार किसी भी राज्य के साथ दोगलापन रवैया नही अपना सकती .. किसी भी वस्तु का मूल्य हर राज्य के लिए समान होना चाहिए | इसलिए अबिलम्ब केन्द्र सरकार गुजरात को भी उसी दाम पर सीएनजी दे जिस दाम पर वो दूसरे राज्यों को देती है |
यहाँ तक कि हाईकोर्ट ने केन्द्र सरकार की सुप्रीम कोर्ट मे जाने के विकल्प स्टे को भी नही दिया ..
और कहा की ये आदेश आज से इसी वक्त से लागू माना जायेगा और इस मामले मे केन्द्र को सुप्रीम कोर्ट ने जाने के लिए कोई वक्त नही दिया जायेगा .. केन्द्र इस आदेश को लागू करे और फिर अगर सुप्रीम मे जाना चाहती है तो जाये लेकिन स्टे नही मिलेगा क्योकि ये देश को बाँटने की साजिश है |
 
उद्योगो की जमीन की बात करते है, कौआ-काबर जैसे पक्षियो को भैंस अपने ऊपर क्यूँ बेठने देती है , वह क्यू ढोए उनका वजन और परेशानी ? फिर भी कभी किसी भैंस को उनको उड़ते देखा है? यह बिजनेस ---है नेचरल रूल है --- वह पक्षी भैंस के शरीर पर छीपके सारे जीव-जन्तु मार के खा जाता है उनको भोजन मिलता रहता है, और भैंस को किटको से राहत ! बच्चा भी समजे ऐसी बात है, अगर उद्योगो को ऐसी रीयायत नहीं देंगे तो वह गुजरात मे क्यू आएंगे? और गुजरात के विकास का क्या होगा ? पढे लिखो के रोजगार नहीं मिले क्या ? अब वह यह भी कहते है की उसमे गुजरातिओ को ज्यादा नौकरीया नहीं देते ! तो जरा जिनको नहीं मिल पायी की क्या वह इस योग्य है? आज सारी दुनिया मे डार्विन का नियम लागू हुआ है की जो कोई वक्त के साथ कदम नहीं मिला पाते वह अपनेयाप सिस्टम से आऊट हो जाते है ! और जिनको रोजगार मीले वो सारे क्या गैर गुजराती है ! आज गुजरात के एंजीनियर और टेकनीकल लोग कहाँ काम कर रहे है ? 10 जनपथ पे? नही वहाँ पे तो ऐसा बोलने वाले और बेतुके मुद्दे बनानेवाले कर रहे है ....
 अब बच्चो के गुम होने की बात करते है..... भारत सरकार के आंकड़ो के ही अनुसार गुजरात बच्चे गुम होने के मामले मे गुजरात 12 वे स्थान पर है, ऊपर से गुजराती लोग इतने गैर जिम्मेदार है की गुम शुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाते है और जब उनके बेटे 32% मामलोमे वापिस आ चुके थे फिर भी यह बात पुलिस को नहीं बताई ! यह कानूनन गुनाह है .....माँ-बाप पे गलत रिपोर्ट करने की कार्यवाही कर शकती है सरकार ....क्यूंकी कानूनन वह बच्चा अगवा या लापता होता है ! और यह बच्चे चुराने का गुनाह आज किस कक्षा पे है उसके लिए एक फिल्म ट्राफिक सिग्नल देख लिजीएगा ! तो सावधानी खुद जनता को भी बरतनी पड़ेगी ...! और वापस आए बच्चो के माँ-बाप को अनुरोध है, कोई कानूनी धारा लगे उससे पहले नजदीकी किसी भी पुलीस स्टेशन मे 0 नं एफ़आईआर दर्ज करवा शकते है! या फिर कमसे कम 100 पे कॉल करके भी बता दे ! अगर हक मांग रहे हो तो फर्ज भी अदा करो !!!

हमारे देश मे पढे लिखे अनपढ़ों की तादाद बहुत ज्यादा है , जो स्कूली किताबों से बाहर कभी मुंह निकाल के असली इतिहास पढे या फिर देश के व्यवस्था तंत्र को जाने ! यहाँ तो जो बाप तय करेगा उसे ही सारा परीवार वोट देगा ! और वो भी सिर्फ गांधी नाम की वजहसे ! और गांधी नाम कैसे दीया इन इटालियन औलादों को वह तक नाही मालूम उन्हे !! तो अब भी गांधी के नाम और फोटो पे वोट खा जाते है और फिर ऊपर जा के नोट खाते है ! इस लिए वह सरकार मे है ! उन्हे धंधा बना दिया राजनीति को ...वरना वाजपाईजी एक वोट के खातिर कुर्सी छोड़ दी ...तो क्या वह नहीं खरीद शकते थे एक के सौ वोट ! फिर भी उन्होने असुलो से समजौटा किए बगर अपनी सरकार को विपक्ष बना दिया ! और आज देखो ! एक एक सांसद का भाव है ---अभी अभी शरद पवार का भाव बढ़ा वो तो देखा ही होगा !
अगर तुम्हारे पास डिटेल है की उद्योगो को दी गई जमीन उपजाऊ हौ और उसको सेज के लिए दिया हो तो बताओ !
मे वही कह रहा हूँ ...! आज कीतने युवा खेती करना चाहते है ? आज कितनी जमीन उपजाऊ मिट्टी वाली बची है
आज किसान इंसान मजबूरी से बनाता है अगर वो पढ़ लिख कर एंजीनियर --क्लार्क -अकाउंटंट नहीं बन पाया ---पढ़ाई बीच मे ही छोड दी तो बन गया मजबूरन किसान और

जिस गोचर की जमीनो की बात कर रहे है तो आज कितने लोग के पास पशु-पालन का व्यवसाय है ? और कीं जानवरो को चारा नहीं मील पाता ...! तो अगर घर मे भी दो-तीन कमरे खाली हो तो उसे भाड़े पे दे के और वो भी कोई धंधा करनेवाले को तो दोहरा फाइदा होता है
एक तो , भाड़े की आम्दानी और अपने संतानों और रीशते डरो को रोजगार उनही के व्यवसाय मे !
अब की जब पाकिस्तान-चीन - और बांग्लादेशियों को देश की जमीन दे देनी वाली कॉंग्रेस से तो बहतर है की यहाँ जमीन अपने देश वासियो के हीट मे उद्योग और रोजगार देने के लिए उपयोग हो !
तो जिसकी जमीन है वह किसान क्यू आवाज नहीं उठाते ...अगर उन्हे अपनी जमीन नहीं देनी है तो ?
यूपी मे कीय ही था ना विरोध .....तो ऐसा विरोध यहाँ भी तो करावा शकती है कॉंग्रेस
  सागर किनारा ---- जहां पे सिर्फ मच्छीमारी और पाकिस्तानी आतंकवादी यो का रास्ता था - आज औद्योगिक बंदर बन जाने पर देश का 32% समान इसी किनारो से आता है ! वरना उजाड़ किनारे कोई रखवाला तक नहीं था

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