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Tuesday, October 16, 2012

नेहरू को कोई भी हिन्‍दुस्‍तानी प्रधानमंत्री नही बनाना चाहता था।

(45) ȨJugal Ȩguru

Shameful True History..! To RULE INDIA THEY RUIN INDIA
आजादी के समय प्रधानमंत्री पद के लिये मतदान हुये
जिसमें 16 बड़े राज्‍यों के लोगों... ने वोट डाले थे।
जिसमें 16 में से 13 वोट सरदार वल्‍लभ भाई पटेल के लिये,
2 लाल बहादुर शास्‍त्री के लिये...और
1 वोट मौलाना अबुल कलाम आजाद के लिये था।
नेहरू के लिये एक भी वोट नही पढ़ा था।
नेहरू को कोई भी हिन्‍दुस्‍तानी प्रधानमंत्री नही बनाना चाहता था। जब नेहरू को पता चला तो वे गांधी के पास जाकर रोए-गिड़गिड़ाए, इसके बाद गांधी ने सरदार पटेल को जाकर समझाया और पटेल तो गांधी के भक्‍त थे सो नेहरू के लिये प्रधानमंत्री की गद्दी छोड़ दी। जिसका परिणाम आज तक हिन्‍दुस्‍तानी भुगत रहा है। ये सब बातें गांधी ने स्‍वयं ही अपने एक किताब में लिख रखी है। किताब का नाम है
\'\'द हिडेन साइड ऑफ गांधी\'\‘
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असली मौत के सौदागर कौन है कांग्रेस है या बीजेपी I

 झूठे सेक्युलारिस्म के लिए कई निर्दोशो को बलि का बकरा बना दिया-असली मौत के सौदागर कौन है कांग्रेस है या बीजेपी I

IF MODI SIR IS CULPRIT......WHOLE CONGRESS CULPRIT....!
4000 MURDERS....In 1984......પૂછે ગુજરાત..?? આપો જવાબ અમને અને ગુજરાત ને?
१९८४ के बारे में बात करते है I जहा पर इंदिरा गांधीजी के हत्यारे शीख होने के कारन बेवजह डेल्ही के हजारो शीखो...
को मौत के घाट उतारा I इतना तो सही है लेकिन उसको जनता का रोष जताकर ठन्डे बसते में डालने की बात कांग्रेस कर रही है I और उनके जिम्मेदार नेता आज केंद्र में है I जिनको कोई सजा नहीं होगी I
कांग्रेस ही सही तौर पर भारत में असली कम्युनल पार्टी है जो दंगे फैलाती है I गुजरात में कांग्रेस के शाशन के दौरान कई दंगे हुए है I जिसमे कई हिन्दू मारे गए है और कई घर उजाड़ दिए गए थे I आज पश्चिम अहमदाबाद में बसने वाले किसी भी लोगो से पुचो आपको एक ही जवाब मिलेगा की क्प्नग्रेस के शाशन में कई दंगे हुए है और कई हिन्दू मरे गए है I
Photo: IF MODI SIR IS CULPRIT......WHOLE CONGRESS CULPRIT....! 4000 MURDERS....In 1984......પૂછે ગુજરાત..?? આપો જવાબ અમને અને ગુજરાત ને? अब १९८४ के बारे में बात करते है I जहा पर इंदिरा गांधीजी के हत्यारे शीख होने के कारन बेवजह डेल्ही के हजारो शीखो को मौत के घाट उतारा I इतना तो सही है लेकिन उसको जनता का रोष जताकर ठन्डे बसते में डालने की बात कांग्रेस कर रही है I और उनके जिम्मेदार नेता आज केंद्र में है I जिनको कोई सजा नहीं होगी I       कांग्रेस ही सही तौर पर भारत में असली कम्युनल पार्टी है जो दंगे फैलाती है I गुजरात में कांग्रेस के शाशन के दौरान कई दंगे हुए है I जिसमे कई हिन्दू मारे गए है और कई घर उजाड़ दिए गए थे I आज पश्चिम अहमदाबाद में बसने वाले किसी भी लोगो से पुचो आपको एक ही जवाब मिलेगा की क्प्नग्रेस के शाशन में कई दंगे हुए है और कई हिन्दू मरे गए है I सच में कांग्रेस का दामन कई निर्दोशो के खून से लाल है I चाहे वोह शीख हो या कोई भी अपने झूठे सेक्युलारिस्म के लिए कई निर्दोशो को बलि का बकरा बना दिया और गाँधी की पार्टी और अहिंसा की पुजारी बता कर सत्ता का सुख ले रही है I बोफोर्स, शीख, भोपाल कांड ऐसे और कई खूंखार खुनी कांड है जो यह साफ़ करता है असली मौत के सौदागर कौन है कांग्रेस है या बीजेपी I         कई नेता कौभांड में शामिल है फिर भी आज भी खुर्शी पे चीपके हुए है I आप की अगुईवाली कई राज्य सरकारों के राज्य में किसान आत्महत्या कर रहा है, पीने को पानी नहीं, बीजली नहीं वैसा हल गुजरात में नहीं I यहाँ पानी एवम लाइट २४ घंटे मौजूद है और किसान भी खुशहाल है I आप ही ने अपने विदेश प्रेम के कारन क्वोत्रोची एवम एंडरसन को देश में से बाइज्जत बरी किया और हो भी क्यों न विदेशी ही तो कांग्रेस को चला रही है I इसलिए विदेश प्रेम जायज है I अंत में किसी और को कुछ कहने से पहले अपने दमन में एक बात जाक लेने चाहिए कही वो दागी तो नहीं अगर है तो पहले उसे साफ़ करना चाहिए बाद में किसी और को बताना चाहिए I इसीलिए १९८४ भोपाल कांड, शीख कांड के बावजूद कांग्रेस बीजेपी को मौतकी सौदागर मानती है तो वोह क्या है ?                   गोधरा में हुए २००२ के दंगो के लिए कांग्रेस एवम अन्य राजनीतिक पक्ष बीजेपी को और खास तौर पर नरेन्द्र मोदी को जिम्मेदार मान रही है I इस दंगो की शुरुआत गोधरा से हुई जहा साबरमती ट्रेन से लौट रहे रामसेवको को कुछ लोगो ने डब्बे में बांध करके जलादिया था I जो उस समय के रेलमंत्री लालू यादव ने कहा की आग अंदर से ही लगे गई थी I               मेरा उनसे एक प्रश्न यह है की कोई भी इन्सान इतना पागल तो नहीं होता की अपने आप को जिन्दा जला डाले I और ऐसे लोगो को जो ठीक से बोल भी नहीं पाते I उस समय वह का मंजर ऐसा था की कोई भी पत्थर दिल इन्सान सहम जाता I जो माजर था वो वाकई में इतना घिनोना था की जब भी उसकी याद आती है आज भी दिल काप उठता है I हमारी केंद्र सरकार को दंगो में मरे जाने वाले मुस्लिमो की चिंता है लेकिन ट्रेन में जो ५८ लोगो को जिन्दा जलाया उनका क्या?               झूठे सेकुलरिस्म के लिए वाकई में ऐसा अन्याय होना यह हम सेहन नहीं सर सकते I दोनों तरफ से लोग कसूरवार है अगर हिन्दू कसूरवार है तो मुस्लिम भी है क्यूंकि उन्होंने ही आग लगायी थी ट्रेन में अगर ट्रेन में आग नहीं लगी होती तो ऐसा नहीं होता I उस समय के गुजरात कांग्रेस नेता शंकरसिंह वाघेला की भी जाच होनी चाहिए क्यूंकि उस समय वोह भी खली भीथे थे और उनके पास चुनाव में कोई मुद्दा नहीं था और आग लगनेवाले में कांग्रेस का स्थानीय कोर्पोराते भी शामिल था I इसलिए गोधरा ट्रेन कांड की निष्पक्ष जांच फिर से होनी चाहिए और जो ट्रेन में जलकर मर गए है उनके परिवार को भी न्याय मिलना चाहिए I और दंगो में कांग्रेस की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए I

सच में कांग्रेस का दामन कई निर्दोशो के खून से लाल है I चाहे वोह शीख हो या कोई भी अपने झूठे सेक्युलारिस्म के लिए कई निर्दोशो को बलि का बकरा बना दिया और गाँधी की पार्टी और अहिंसा की पुजारी बता कर सत्ता का सुख ले रही है I बोफोर्स, शीख, भोपाल कांड ऐसे और कई खूंखार खुनी कांड है जो यह साफ़ करता है असली मौत के सौदागर कौन है कांग्रेस है या बीजेपी I
कई नेता कौभांड में शामिल है फिर भी आज भी खुर्शी पे चीपके हुए है I आप की अगुईवाली कई राज्य सरकारों के राज्य में किसान आत्महत्या कर रहा है, पीने को पानी नहीं, बीजली नहीं वैसा हल गुजरात में नहीं I यहाँ पानी एवम लाइट २४ घंटे मौजूद है और किसान भी खुशहाल है I आप ही ने अपने विदेश प्रेम के कारन क्वोत्रोची एवम एंडरसन को देश में से बाइज्जत बरी किया और हो भी क्यों न विदेशी ही तो कांग्रेस को चला रही है I इसलिए विदेश प्रेम जायज है I
अंत में किसी और को कुछ कहने से पहले अपने दमन में एक बात जाक लेने चाहिए कही वो दागी तो नहीं अगर है तो पहले उसे साफ़ करना चाहिए बाद में किसी और को बताना चाहिए I इसीलिए १९८४ भोपाल कांड, शीख कांड के बावजूद कांग्रेस बीजेपी को मौतकी सौदागर मानती है तो वोह क्या है ?
गोधरा में हुए २००२ के दंगो के लिए कांग्रेस एवम अन्य राजनीतिक पक्ष बीजेपी को और खास तौर पर नरेन्द्र मोदी को जिम्मेदार मान रही है I इस दंगो की शुरुआत गोधरा से हुई जहा साबरमती ट्रेन से लौट रहे रामसेवको को कुछ लोगो ने डब्बे में बांध करके जलादिया था I जो उस समय के रेलमंत्री लालू यादव ने कहा की आग अंदर से ही लगे गई थी I
मेरा उनसे एक प्रश्न यह है की कोई भी इन्सान इतना पागल तो नहीं होता की अपने आप को जिन्दा जला डाले I और ऐसे लोगो को जो ठीक से बोल भी नहीं पाते I उस समय वह का मंजर ऐसा था की कोई भी पत्थर दिल इन्सान सहम जाता I जो माजर था वो वाकई में इतना घिनोना था की जब भी उसकी याद आती है आज भी दिल काप उठता है I हमारी केंद्र सरकार को दंगो में मरे जाने वाले मुस्लिमो की चिंता है लेकिन ट्रेन में जो ५८ लोगो को जिन्दा जलाया उनका क्या?
झूठे सेकुलरिस्म के लिए वाकई में ऐसा अन्याय होना यह हम सेहन नहीं सर सकते I दोनों तरफ से लोग कसूरवार है अगर हिन्दू कसूरवार है तो मुस्लिम भी है क्यूंकि उन्होंने ही आग लगायी थी ट्रेन में अगर ट्रेन में आग नहीं लगी होती तो ऐसा नहीं होता I उस समय के गुजरात कांग्रेस नेता शंकरसिंह वाघेला की भी जाच होनी चाहिए क्यूंकि उस समय वोह भी खली भीथे थे और उनके पास चुनाव में कोई मुद्दा नहीं था और आग लगनेवाले में कांग्रेस का स्थानीय कोर्पोराते भी शामिल था I इसलिए गोधरा ट्रेन कांड की निष्पक्ष जांच फिर से होनी चाहिए और जो ट्रेन में जलकर मर गए है उनके परिवार को भी न्याय मिलना चाहिए I और दंगो में कांग्रेस की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए I
आईना सच का ! सोचो या फोड़ो ! सच तो सच रहेगा !

 

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Wednesday, October 10, 2012

█║▌►•कॉंग्रेसका 48लाख करोड़ का !! घोटालो का दादा !! थोरीयम घोटाला !!

█║▌►•कॉंग्रेसका 48लाख करोड़ का !! घोटालो का दादा !! थोरीयम घोटाला !!
►•सावधान! इतिहासका सबसे बड़ा घोटाला ला रही है कॉंग्रेस और सोनिया मंडली~ “थोरीयम घोटाला”सिर्फ 48लाख करोड़
►•देश की 99.9 % जनता जानती भी नहीं होगी की ये थोरीयाम भला क्या बला है ?
▌►•थोरीयम एक खनिज है जो समंदर की रेत मे से प्राप्त होता है ! और उसकी कीमत इस लिए ज्यादा है की दुनिया के किसिभी ऊर्जा खनिज के मुक़ाबले वह कम खर्च मे ज्यादा ऊर्जा दे पाता है ! आज एक एसा तत्व यूरेनियम-प्लूटोनियम और परमाणु ऊर्जा से आप वाकिफ होंगे ही ! पर उसकी दुर्लभता से ज्यादा नकारात्मक पहलू है उसके कचरे का निकाल करना जो अत्यंत जहरीला होता है और लंबे अरसे सेकड़ों सालो तक उसमे से विकिरण निकलते ही रहते है ! तो उसके मुक़ाबले थोरीयम ज्यादा कार्यक्षम और बहुत ही कम झहरीला है !
▌►•थोरीयम भविष्य का ईंधन है ! ग्लोबल वोरमींग की वजह से पूरी दुनिया आज ऐसी ऊर्जा के पीछे भाग रही है जो प्रदूषण कम करती हो और वातावरण को ज्यादा दूषित ना करती हो ! तो इस खनीज़ कच्चे थोरीयम का भाव 100 $ प्रति टन भी ले तो घोटाले की रकम 48 लाख करोड़ है ! ये भी जानिए शुद्धा थोरीयाम कीमत मे 3 लाख डॉलर प्रति टन है !
▌►•अब सबसे खुशी की बात यह है की दुनिया मे सबसे ज्यादा थोरीयाम सिर्फ भारत के पास ही है समंदर की रेत मे छिपे हुए खनिज के रुप मे अमरीकन एजंसी आईएईए के 2005 के रिपोर्ट के अनुसार हमारे देश मे 5,19,000 टन यानि करीब सवा पाँच टन है ! पर कॉंग्रेस मे जबसे 2004 से मनमोहन प्रधान मंत्री बने तब से अब तक 1,95,300 टन निकास हो चुका है थोरीयम के रूप मे नहीं रेत और अन्य खनिज के नाम पर, जिस से देश को सिर्फ उसकी कीमत के 9.3% आय हुई है बाकी के 91.7% मे से कॉंग्रेस ने कितनी कितनी बंदर बाँट की वो तो आनेवाला समय ही बताएगा !║ [CLICK PIC2READ FULL]║▌►• पूरा लेख पढ़ने पिक्चर क्ल्लिक करे !║
~ सावधान इंडिया ! : जुगल ईगुरु [3-9-12]
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Tuesday, October 9, 2012

ગાંધીવાદી પક્ષ લાલ-લીલા ગાંધીજીના વોટરમાર્ક ફોટો વાળા કાગળ સ્વિસ-બેંકોમા ટ્રાંસફર

ƪJugal Eguru  ▐ ગાંધીવાદી પક્ષ લાલ-લીલા ગાંધીજીના વોટરમાર્ક ફોટો વાળા કાગળ સ્વિસ-બેંકોમા ટ્રાંસફર ▐

ગાંધીવાદી પક્ષ ગાંધીને એટલા સમર્પિત છે કે, લાલ-લીલા ગાંધીજીના વોટરમાર્ક ફોટો વાળા એક પણ કાગળ જવા દેતા નથી, અને સલામતી માટે સ્વિસ-બેંકોમા ટ્રાંસફર કરાય છે...!!!
પ્રજા વાત ના કરે પોતાના અધિકારની......જો એ ઊતારી ના શકે ખુરશી ભ્રષ્ટ કેંદ્ર સરકારની
-જુગલ ઇગુરૂ
કેંદ્રના પ્રધાનોની સંપત્તિમાં આવેલી ઝડપી બરકતનું, જેને ફિલ્મી ભાષામાં વન ટુ કા ફોર કહો તો ચાલે.
Φ મે, ૨૦૦૯માં પ્રધાનદીઠ મિલકતનો સરેરાશ ફિગર Rs.૭.૩ કરોડ હતો,
Φ જે માત્ર ૨૮ મહિના પછી ઓગસ્ટ, ૨૦૧૧માં એવરેજ Rs.૩.૩ કરોડના વધારા સાથે Rs.૧૦.૬ કરોડની સપાટીએ પહોંચ્યો.
વિશેષ ધ્યાન ખેંચનાર અને દરેક ધંધાદારી અકાઉન્ટન્ટ માટે વિચારપ્રેરક દ્રષ્ટાંત ▐ પ્રફુલ્લ પટેલનું લેખાય, જેમણે
Φ મે, ૨૦૦૯ની ચૂંટણી વખતે એફિડેવિટમાં પોતાની અસ્કયામતો Rs.૭૯ કરોડ હોવાનું જણાવ્યું હતું.
Φ ૨૦૧૧ના ઓગસ્ટ સુધીમાં તો તેમણે પોતાની સ્થાવર અને જંગમ મિલકતો વધારીને Rs.૧૨૨ કરોડ જેટલી કરી નાખી.
▐ સાદી ગણતરી માંડો તો જણાય કે વચગાળાના ૨૮ મહિનામાં તેમની આવકનું મીટર રોજના Rs.૫,૦૦,૦૦૦ કરતાં વધુ દરે ફર્યું. આ બધો સમય તેઓ નાગરિક ઊડ્ડયન ખાતાના પ્રધાન હતા.
આશ્ચર્યના બીજા આંચકા માટે તૈયારી રાખો. પ્રફુલ્લ પટેલની સંપત્તિમાં ૫૩%નો વધારો જો માનો યા ન માનો જેવો જણાતો હોય તો ૧૦૯૨%ના વધારા અંગે શું માનો છો ? કેંદ્ર સરકારના
Φ એસ. જગતરક્ષકન નામના મંત્રીએ ૨૦૦૯માં ચૂંટણી વખતના સોગંદનામા મુજબ પોતાની મૂડી Rs.૫.૯ કરોડ બતાવી હતી.
Φ ૨૦૧૧માં તેમનો એ જુમલો રોકેટવેગે વધીને Rs.૭૦ કરોડે પહોંચ્યો. ધનભંડારમાં તેમણે રોજેરોજ સરેરાશ Rs.૭,૬૨,૦૦૦ ઉમેર્યા.
Φ જુનિઅર પ્રધાન મિલિંદ દેવરાને તેમણે ક્યાંય ભોંઠાં પાડી દીધા, કારણ કે દેવરાએ રોજના લગભગ Rs.૧,૯૦,૦૦૦ કરતાં વધુ ગજુ કાઢ્યું નહિ.
Φ બીજા જુનિઅર પ્રધાન રાજીવ શુક્લનું ગાડું દૈનિક Rs.૨,૬૦,૦૦૦ પાસે અટક્યું.
આ બધા જાજરમાન આંકડા જોયા પછી સવાલ એ થાય કે સરકારને દૂધે ધોયેલી જાહેર કરવા વડા પ્રધાને દાખવેલી પારદર્શકતામાં ખરેખર પારદર્શક જેવું શું છે ? પ્રધાનોની આંજી દેતી સંપત્તિ પ્રજાની નજર સામે આવી છે, પણ આવકના કયાં સાધનો દ્વારા સંપત્તિનો ખડકલો કરાયો તે જાણવાનો પ્રજાને અધિકાર ખરો કે નહિ ? પાયાનો સવાલ તો એ છે. સવારથી સાંજ લગી કેંદ્ર સરકારના મંત્રાલયમાં (અને વચ્ચે ક્યારેક પાર્લામેન્ટમાં) બેસી રહેતો પ્રધાન રોજના પાંચ-સાત લાખ રૂપિયાની ટંકશાળ કેવી રીતે પાડે એ પ્રજાએ જાણવું રહ્યું અને સરકારે જણાવવું રહ્યું. ખાસ કરીને એવા માહોલમાં કે જ્યાં (ડો. અર્જુનસેન ગુપ્તા કમિટિના રિપોર્ટ મુજબ) ૮૩.૬ કરોડ લોકોને રોજની Rs.૨૦ થી વધુ આમદાની મળતી નથી.