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Saturday, April 13, 2013

2014 में होने वाले में आम चुनाव में लोकसभा की लगभग 160 सीटों पर ट्विटर-फेसबुक का असर

चुनाव के नतीजों पर ट्विटर-फेसबुक का असर?

फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया के मंच का इस्तेमाल करने वाले लोग नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं?

एक नए अध्ययन में इसी सवाल का जवाब खोजा गया है.

आयरिश नॉलेज फाउंडेशन एंड इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने इस पर एक शोध किया है और कहा है कि 2014 में होने वाले में आम चुनाव में लोकसभा की लगभग 160 सीटों पर इसका असर दिखाई दे सकता है.

सर्वाधिक प्रभाव वाली सीटें

अध्ययन में सबसे सर्वाधिक प्रभाव वाली सीटों की पहचान की गई है.सबसे अधिक प्रभाव वाली सीटों का तात्पर्य उन सीटों से है, जहां पिछले लोकसभा चुनाव में विजयी उम्मीदवार के जीत का अंतर फेसबुक का प्रयोग करने वालों से कम है अथवा जिन सीटों पर फेसबुक का प्रयोग करने वालों की संख्या कुल मतदाताओं की संख्या का 10 प्रतिशत है.

अध्ययन में 67 सीटों की 'अत्यधिक प्रभाव वाली', जबकि शेष सीटों की 'कम प्रभाव वाली' सीटों के रूप में पहचान की गई है.

लोकसभा की कुल 543 में से 160 सीटों पर सोशल मीडिया का खासा असर देखने को मिल सकता है. महाराष्ट्र में इसका सबसे ज्यादा असर पडऩे की संभावना है. यहां की 21 सीटों पर सोशल मीडिया का असर पड़ सकता है."

महाराष्ट्र और गुजरात आगे

जबकि गुजरात में 17 सीटें सोशल मीडिया से प्रभावित हो सकती हैं. इसी तरह उत्तर प्रदेश में 14, कर्नाटक की 12, तमिलनाडु की 12, आंध्र प्रदेश की 11, केरल की 10 और मध्य प्रदेश की 9 सीटों पर इसका असर देखने को मिल सकता है.

ये वो लोकसभा सीटें हैं जहां लोग सोशल नेटवर्किंग साइट का इस्तेमाल सबसे ज्यादा करते हैं. इन निर्वाचन क्षेत्रों में कुल मतदाताओं के दस फीसदी से ज्यादा लोग फेसबुक से जुड़े हुए हैं.

सर्वेक्षण के मुताबिक फेसबुक से जुड़े लोग चुनाव से पहले अपने आसपास के वोटरों को प्रभावित कर सकते हैं.

अध्ययन का ये भी कहना हैं कि चुनाव से 48 घंटे पहले उम्मीदवारों के चुनाव प्रचार पर रोक लगने के बाद फेसबुक, ट्विटर जैसी सोशल मीडिया चुनाव प्रचार की कमान संभाल लेंगे.

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Friday, April 12, 2013

फेसबुक राजनीति में आहिस्ता आहिस्ता राजनीति में पैंठ बनाने में सक्षम बना रहा है

फेसबुक राजनीति में आहिस्ता आहिस्ता राजनीति में पैंठ बनाने में सक्षम बना रहा है - ताकत तकनीक की ...... या तो तैयार रहो .... या तो मीट जाओ !

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राजनीति में धीरे धीरे पैठ बना रहा है फेसबुक गूगल, फेसबुक और माइक्रोसॉफ्ट सहित अमेरिका की कुछ शीर्ष तकनीकी कंपनियों ने अमेरिकी आव्रजन नीति से जुड़े अहम मुद्दों के लिए आपस में हाथ मिलाया है। फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने इस समूह को एफडब्ल्यूडी का नाम दिया है जो उन्हें आहिस्ता आहिस्ता राजनीति में पैंठ बनाने में सक्षम बना रहा है और अमेरिका में आव्रजन सुधार को आगे बढाने के साथ ही वहां के उन प्रवासियों को मदद पहुंचा रहा है जो अभी तक पंजीकृत नहीं हैं।

वाशिंगटन पोस्ट में कल जुकरबर्ग ने लिखा, ‘‘ हमारी आव्रजन नीति विचित्र है ओैर आज की दुनिया के लिए उपयुक्त नहीं है। ’’ नये समूह का कहना है कि वह आव्रजन सुधार , बेहतर स्कूलों के मुद्दे के साथ साथ वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए और धन जुटाने को लेकर कांग्रेस और व्हाइट हाउस में लॉबिंग करने के साथ ही सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर जनसमर्थन जुटाएगा।

समूह में जुकरबर्ग का साथ नेटफ्लिक्स के सीईओ रीड हेस्टिंग्स , लिंकडिन के संस्थापक रेड हाफमैन ,येल्प के चेयरमैन मैक्स लेव्चिन , याहू के सीईओ मेरिसा मेयर ,ज्येंगा के सीईओ मार्क पिन्कस और गूगल के चेयरमैन एरिक श्मित दे रहे हैं।
जुकरबर्ग ने रेखांकित किया कि अमेरिका की मौजूदा अर्थव्यवस्था प्राकृतिक संसाधनों , औद्योगिक मशीनों और श्रम के बजाए मुख्य तौर पर ज्ञान और विचारों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को सबसे प्रतिभाशाली और मेहनती लोगों को आकषिर्त करने की जरूरत है। और उनमें से कई विदेश में जन्में हैं।

फेसबुक के सीईओ ने कहा, ‘‘ हम ऐसे 40 फीसदी गणित और विज्ञान स्नातकों को शिक्षा देने के बाद देश से बाहर क्यों कर देते हैं जो कि अमेरिका के नागरिक नहीं हैं। ’’ उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, ‘‘ हम क्यों नहीं उद्यमियों को यहां आने देते हैं जबकि वे यहां आकर कंपनियां शुरू कर और नौकरियां पैदा कर सकते हैं। ’’ आव्रजन की बहस में शामिल होने वाले हाई प्रोफाइल चेहरों में अब फेसबुक के सह संस्थापक शामिल हो गए हैं। बुधवार को इस मुद्दे पर अमेरिकी राजधानी और देश भर में आयोजित रैली में हजारों लोगों ने हिस्सा लिया। ( https://www.facebook.com/jugal24x7 )

Friday, February 8, 2013

How to KNOW is Your PC Infected? कैसे जाने आपका कोम्प्यूटर स्पायवर ने बीमार कर दिया Φ जानिए लक्षण

(27) ƪJugal Eguru

 

§ आईटी जागृति और शिक्षा अभियान : ♠ Éगुरु द्वारा|
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▐ ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं चलता, कि कब उनके कंप्यूटर में कोई वायरस या स्पाईवेयर आ गया है। स्पाईवेयर एक तरह का वायरस है, जो आपके कंप्यूटर में चुपचाप रहते हुए आपके सीक्रेट डेटा पर नजर रखता है और जरूरी सूचनाओं को अपने निर्माता हैकर्स के पास भेज देता है। आपके कंप्यूटर में वायरस इन्फेक्शन महीनों तक रहता है और वायरस या स्पाईवेयर आदि मजे से अपना काम करते रहते हैं। पता तब लगता है, जब हार्ड डिस्क क्रैश या डेटा लॉस जैसा कोई बड़ा नुकसान हो जाता है। वायरस या स्पाईवेयर इन्फेक्शन को पहचानना बहुत मुश्किल नहीं है। वायरस इन्फेक्शन के गंभीर रूप लेने से पहले कंप्यूटर में उनके संकेत दिखाई देते हैं। क्या हैं ये संकेत बता रहे हैं
▬♠ कंप्यूटर धीमा
कंप्यूटर बहुत धीमा हो गया है और किसी भी सॉफ्टवेयर को खोलने में ज्यादा समय ले रहा है, तो इसका मतलब है कि कंप्यूटर की मेमरी और सीपीयू का एक बड़ा हिस्सा वायरस या स्पाईवेयर की प्रोसेसिंग में व्यस्त है। ऐसे में कंप्यूटर शुरू होने और इंटरनेट एक्सप्लोरर पर वेब पेज खुलने में देर लगती है।

▬♠ ब्राउजर सेटिंग्स में बदलाव
आपके ब्राउजर का होमपेज अपने आप बदल गया है, तो बहुत संभव है कि आपके कंप्यूटर में किसी स्पाईवेयर का हमला हो चुका है। होमपेज उस वेबसाइट या वेब पेज को कहते हैं, जो इंटरनेट ब्राउजर को चालू करने पर अपने आप खुल जाता है। आमतौर पर हम Tools मेन्यू में जाकर अपना होमपेज सेट करते हैं, जो अमूमन आपकी पसंदीदा वेबसाइट, सर्च इंजन या ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली सविर्स जैसे ई-मेल आदि होता है। पीसी में घुसा स्पाईवेयर आपको किसी खास वेबसाइट पर ले जाने के लिए इसे बदल देता है। ....... [ आगे जारी है ...... स्क्रॉल करे .....§ ]
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▬♠कंप्यूटर हेंग
कंप्यूटर बार-बार जाम या अचानक हेंग होने लगा है, तो यह इन्फेक्शन के कारण हो सकता है। खासकर तब, जब आपने कंप्यूटर में कोई नया सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर भी इंस्टॉल न किया हो।
▬♠पॉप अप विंडोज
इंटरनेट ब्राउजर को चालू करते ही उसमें एक के बाद एक कई तरह की पॉप अप विंडोज खुलने लगती हैं, तो हो सकता है कि इनमें से कुछ में किसी खास चीज या वेबसाइट का विज्ञापन किया गया हो या फिर वे अश्लील वेबसाइट्स के लिंक्स से भरी पड़ी हों।
▬♠चेतावनियां (थेटस)
स्क्रीन पर ऐसे मेसेज बॉक्स दिखाई देने लगें जिनमें कहा गया हो कि कंप्यूटर पर वायरस या स्पाईवेयर का हमला हो चुका है, साथ ही आपको किसी फ्री स्पाईवेयर स्कैनिंग वेबसाइट पर जाने की सलाह दी जाए।
▬♠अजीब से आइकन
आपके डेस्कटॉप या सिस्टम ट्रे में अजीब किस्म के आइकन आ गए हों, जबकि आपने ऐसा कोई सॉफ्टवेयर भी इंस्टॉल नहीं किया है। क्लिक करने पर वे तेजी से अश्लील वेबसाइट्स को खोलना शुरू कर देते हैं।
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▬♠अनजाने फोल्डर और फाइलें
आपके कंप्यूटर की किसी ड्राइव या डेस्कटॉप पर कुछ ऐसे फोल्डर दिखाई देते हैं जिन्हें आपने नहीं बनाया। उनके अंदर कुछ ऐसी फाइलें भी हैं, जिन्हें न तो आपने बनाया और न ही वे किसी सॉफ्टवेयर के इंस्टॉलेशन से बनीं। इसके अलावा उन्हें डिलीट करने के बाद भी वे कुछ समय बाद फिर से आ जाती हैं।
▬♠ आपके ई-मेल क्लाइंट के Sent फोल्डर में ऐसे ई-मेल मेसेज दिखाई देते हैं, जिन्हें आपने कभी नहीं भेजा।
▬♠ इंटरनेट ब्राउजर में कुछ -नए टूलबार आ गए हों। आप इन्हें हटाने की कोशिश करते हैं लेकिन वे या तो हटते ही नहीं या फिर कुछ देर बाद फिर आ जाते हैं।
▬♠कंप्यूटर शांत है लेकिन हार्ड डिस्क में फिर भी घूमने की आवाजें आ रही हों। ................
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Φ याद रखिए - सिक्यूरिटी का एक ही नियम है .... " हम कहीं भी सिक्यूर नहीं ...." फिर भी बचाव करना हमारे हाथ मे है !
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Monday, January 14, 2013

अनजाने साइबर क्राइम Φ CYBER CRIME in INDIA

 

 

अनजाने साइबर क्राइम

 

 

 

 
 
  
 
  
 
  
  

इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले करीब-करीब हर शख्स ने कोई न कोई साइबर क्राइम जरूर किया है। कानूनी नहीं तो नैतिक अपराध तो किया ही है। इनमें से ज्यादातर को तो इसका अंदाजा तक नहीं होता। वे कहीं से भी कोई चित्र, लेख या विडियो कॉपी-पेस्ट करते समय जरा भी नहीं झिझकते। इंटरनेट पर ऐसे तमाम काम हैं, जो साइबर क्राइम के तहत आते हैं। 

कॉपी-पेस्ट या सामग्री की चोरी
- हर क्रिएटिव चीज बनाने वाले के पास एक खास हक होता है जो उसे अपनी सामग्री को गैरकानूनी ढंग से नकल किए जाने के खिलाफ सुरक्षा देता है। इसे कॉपीराइट कहते हैं।
- आपके लेख, कहानी, कविता, व्यंग्य, फोटो, संगीत की धुन, सॉफ्टवेयर, विडियो, कार्टून, एनिमेशन, किताब, ई-बुक, वेबसाइट वगैरह पर आपको यह खास हक हासिल है। कोई भी शख्स आपकी इजाजत के बिना आपकी रचना की कॉपी नहीं कर सकता और न ही उसे दूसरों को दे सकता है। ऐसा करना कॉपीराइट कानून का उल्लंघन है और आप उसके खिलाफ अदालत जा सकते हैं।
- कॉपीराइट लेने की एक कानूनी प्रक्रिया है, लेकिन अगर ऐसा नहीं भी करते, तो भी अपनी रचना पर आपका ही हक है।

- इसी तरह अगर आप किसी और का फोटो उसकी लिखित मंजूरी के बिना अपने फेसबुक प्रोफाइल पर पोस्ट करते हैं तो वह साइबर क्राइम है। गूगल इमेज या दूसरी इमेज होस्टिंग वेबसाइटों से अपनी पसंद का कोई फोटो लेकर उसे अपने ब्लॉग, सोशल नेटवर्किंग ठिकाने, वेबसाइट या पत्र-पत्रिका में इस्तेमाल करना भी उसी कैटिगरी में आता है।
- गूगल एक सर्च इंजन भर है, वह फ्री डाउनलोड साइट नहीं है। इसीलिए वह किसी भी पिक्चर के साथ उस वेब पेज को भी दिखाता है, जहां से उसे ढूंढा गया है। ऐसा करके वह पिक्चर चुराए जाने के मामले में किसी भी तरह की जिम्मेदारी से आजाद हो जाता है।

क्या करें

- अगर आपको गूगल इमेज सर्च पर मौजूद कोई फोटो इस्तेमाल करना है, तो कायदे से उस वेब पेज के संचालक से इजाजत लेनी चाहिए।
- अगर कोई शख्स अपनी रचना को लेकर ज्यादा ही गंभीर हो, तो यह छोटी सी चोरी आपको भारी पड़ सकती है। जिस गूगल के जरिये आपने वह लेख, फोटो या विडियो ढूंढा है, उसी के जरिये आपकी चोरी भी पकड़ी जा सकती है।

मजेदार साभार
- कुछ ब्लॉगों पर बड़ी दिलचस्प बातें नजर आती है। ब्लॉगरों ने गूगल इमेजेज से फोटो का इस्तेमाल किया और बतौर सावधानी नीचे साभार गूगल लिख दिया।
- गूगल पर दिखने वाले सर्च नतीजों, फोटो वगैरह पर गूगल का कोई मालिकाना हक नहीं है। वे तो महज रेफरेंस के तौर पर दिए गए हैं, जिससे आप सही ठिकाने तक पहुंच सकें।
- आभार ही जताना है तो उस वेबसाइट का जताइए, जहां से गूगल ने उसे ढूंढा है।

चाइल्ड पॉर्नोग्रफी देखना
- अगर आप जाने या अनजाने अपने इंटरनेट कनेक्शन के जरिये चाइल्ड पॉर्नोग्रफी (बच्चों के अश्लील चित्र, विडियो, लेख आदि) देखते हैं तो वह साइबर क्राइम है।
- आपने ऐसी किसी सामग्री को अपने किसी दोस्त को फॉरवर्ड कर दिया तो आप एक और साइबर क्राइम कर चुके हैं।
- 18 साल से कम उम्र वालों से संबंधित अश्लील सामग्री देखना, इंटरनेट से भेजना और सहेजना साइबर क्राइम है।
- इन्हें न खुद देखें, न किसी को फॉरवर्ड करें।

लोगो की चोरी
- इंटरनेट पर लोगो, आइकंस, प्रतीक चिह्नों, ट्रेडमार्क वगैरह की चोरी भी आम है।
- नया काम खोलना है या नई वेबसाइट बनानी है लोगो के लिए इंटरनेट सर्च से बेहतर जरिया क्या होगा?
- अच्छा सा लोगो दिखाई दिया और आपने उसे कॉपी कर इस्तेमाल कर लिया या किसी डिजाइनर की सेवा ली जिसने झटपट इंटरनेट से किसी कंपनी का अच्छा सा लोगो इस्तेमाल कर आपका विजिटिंग कार्ड, ब्रोशर और लेटरहेड तैयार कर दिया। ऐसा करके आपने न सिर्फ कॉपीराइट का उल्लंघन कर चुके हैं बल्कि ऑनलाइन ट्रेडमार्क के उल्लंघन मामले में भी आपको दोषी करार दिया जा सकता है।
- ऐसे किसी भी लोगो या आइकन का प्रयोग अपने बिजनेस आदि के लिए न करें।

वाई-फाई का दुरुपयोग
- जुलाई 2008 में अहमदाबाद बम विस्फोटों के बाद उनकी जिम्मेदारी लेते हुए आतंकवादियों ने जो ईमेल भेजा था, वह आपके-हमारे जैसे ही किसी आम इंटरनेट यूजर के वाई-फाई कनेक्शन का इस्तेमाल करके भेजा था। जांच एजेंसियों ने पता लगाया कि यह ईमेल नवी मुंबई के एक ?लैट में लगे वायरलेस इंटरनेट कनेक्शन के जरिये आया था। जाहिर है, उन्होंने यही निष्कर्ष निकाला कि जिस घर से मेल भेजा गया, वह किसी न किसी रूप में हमलावरों से जुड़ा हुआ होगा, लेकिन इस फ्लैट में रहता था मल्टिनैशनल कंपनी में काम करने वाला अमेरिकी नागरिक केनेथ हैवुड। अब उसे समझ आया कि इंटरनेट कनेक्शन लगाने वाले इंजिनियर ने क्यों कहा था कि उसे अपने वाई-फाई नेटवर्क का पासवर्ड जल्दी ही बदल लेना चाहिए। दरअसल, हैवुड के वाई-फाई कनेक्शन में कोई सिक्युरिटी सेटिंग नहीं की गई थी और आस-पास से गुजरता कोई भी शख्स हैवुड के कनेक्शन का इस्तेमाल कर सकता था। आतंकवादियों ने यही किया और हैवुड एक आतंकवादी मामले में गिरफ्तार होते-होते बचा।
- अगर कोई अपराधी आपके इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल करते हुए साइबर क्राइम करता है तो पुलिस उसे भले ही न ढूंढ पाए, आप तक जरूर पहुंच जाएगी और नतीजे भुगतने होंगे आपको।
- अगर वाई-फाई इंटरनेट कनेक्शन इस्तेमाल करते हैं तो उसे पासवर्ड प्रोटेक्ट करना और एनक्रिप्शन का इस्तेमाल करना न भूलें।

वायरस, स्पाईवेयर
- अगर आपके कंप्यूटर पर किसी वायरस या स्पाईवेयर ने कब्जा जमा लिया है और वह जोम्बी में तब्दील हो गया है तो समझिए, आप अपने कंप्यूटर और डेटा की असुरक्षा के साथ-साथ साइबर क्राइम में भी फंस सकते हैं। मुमकिन है, आप किसी परोक्ष साइबर क्राइम में हिस्सेदार बन रहे हों।
- कुछ वायरस और स्पाईवेयर न सिर्फ आपके कंप्यूटर के डेटा और निजी सूचनाएं चुराकर अपने संचालकों तक भेजते हैं बल्कि आपके संपर्क में मौजूद दूसरे लोगों तक अपनी प्रतियां पहुंचा देते हैं। कभी इंटरनेट के जरिये, कभी ईमेल के जरिये तो कभी लोकल नेटवर्क के जरिये। जिन लोगों के कंप्यूटर में आपके जरिये वायरस या स्पाईवेयर पहुंचा और कोई बड़ा नुकसान हो गया, उनकी नजर में दोषी कौन होगा? आप। ऐसे मामलों में आप अपनी कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
- कंप्यूटर में अच्छा एंटिवायरस, एंटिस्पाईवेयर और फायरवॉल जरूर लगवाएं। ये सिर्फ आपकी साइबर सुरक्षा के लिहाज से ही जरूरी नहीं है बल्कि इसलिए भी है कि कहीं आप अनजाने में कोई साइबर अपराध न कर बैठें।

किसी का अकाउंट खोलना
- कुछ लोग अपने दोस्तों और साथियों के ईमेल अकाउंट, फेसबुक वगैरह का पासवर्ड ढूंढने की कोशिश करते हैं और कभी-कभी सफल भी हो जाते हैं। हो सकता है, आप महज मौज-मस्ती या मजाक के लिए ऐसा कर रहे हों लेकिन अगर आप किसी का पासवर्ड हासिल करने के बाद उसके खाते में लॉग-इन करते हैं तो आप साइबर क्राइम कर रहे हैं।
- ऐसा तब भी होता है, जब किसी ने आप पर भरोसा करके आपको अपना पासवर्ड बताया हो। यह खाता ईमेल, सोशल नेटवर्किंग, ब्लॉग, वेबसाइट, ऑनलाइन स्टोरेज सविर्स, ई-कॉमर्स साइट, इंटरनेट-बैंकिंग जैसा हो सकता है।
- किसी की प्राइवेसी में सेंध लगाने पर आप डेटा प्रोटेक्शन कानून के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी कानून 2000 की धारा 72 के तहत दोषी करार दिए जा सकते हैं।
- किसी का पासवर्ड चुराकर उसका अकाउंट खोलने की कोशिश न करें। साथ ही अगर कोई साथी कहे कि मेरा ईमेल खोलकर देख लेना, यह मेरा पासवर्ड यह है, तो उससे माफी मांग लेने में ही भलाई है।

सॉफ्टवेयर पायरेसी
- भारत के ज्यादातर कंप्यूटर यूजर किसी न किसी सॉफ्टवेयर का पाइरेटेड वर्जन इस्तेमाल कर रहे हैं। चाहे विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम हो, ऑफिस सॉफ्टवेयर सूइट हों या फिर ग्राफिक्स, पेजमेकिंग के सॉफ्टवेयर।
- अब सॉफ्टवेयरों के भीतर एडवांस किस्म के पाइरेसी प्रोटेक्शन और मॉनिटरिंग सिस्टम आने लगे हैं और हो सकता है आपके बारे में भी कंपनियों को जानकारी हो।
- ऐसे सॉफ्टवेयरों का इस्तेमाल करना साइबर क्राइम के तहत आता है। हमेशा ऑरिजनल सॉफ्टवेयर ही यूज करें।

गूगल क्लिक फ्रॉड
- इंटरनेट पर विज्ञापनों के बदले भुगतान की व्यवस्था थोड़ी अलग है। यह विज्ञापनों को क्लिक किए जाने की संख्या पर आधारित है। जैसे दस क्लिक यानी दो डॉलर या करीब 110 रुपये।
- ऐसे में कुछ लोग खुद ही अपने ब्लॉगों पर लगे विज्ञापनों को क्लिक करते रहते हैं या फिर कुछ दूसरे लोगों के साथ गठजोड़ कर लेते हैं। उन्हें पता नहीं कि इंटरनेट पर ऐसे फर्जी क्लिक की निगरानी रखी जा सकती है।
- इस तरह के क्लिक से बचें। यह बड़ा आर्थिक अपराध है और पता लगने पर आपके विज्ञापन तो बंद हो ही सकते हैं, भारी-भरकम जुर्माना या दूसरी सजा भी मिल सकती है।

बैंडविड्थ की चोरी
- कुछ लोग अपनी वेबसाइट पर दूसरी जगहों से ली गई भारी-भरकम ग्राफिक फाइलें (कुछ एमबी के फोटो या विडियो आदि) डालने के लिए शॉर्टकट अपनाते हैं।
- वे फाइलों को अपनी वेबसाइट पर सीधे नहीं डालते बल्कि ऑरिजनल वेबसाइट से ही उन्हें लिंक कर देते हैं। होता यह है कि विडियो या चित्र दिखता तो आपकी वेबसाइट पर है लेकिन असल में वह अपनी ऑरिजनल वेबसाइट पर ही लगा हुआ है, आपके वेब सर्वर पर नहीं है।
- यहां आप दो तरह के साइबर क्राइम कर रहे हैं। पहला कॉपीराइट संबंधी और दूसरा बैंडविड्थ की चोरी।
- बैंडविड्थ की चोरी को ऐसे समझ सकते हैं। हर वेबसाइट को डेटा डाउनलोड का एक खास कोटा मिला होता है और इस सीमा से बाहर जाने पर उसके संचालक को अलग से पैसे का भुगतान करना होता है। जब आप किसी और की साइट पर मौजूद भारी-भरकम विडियो को लिंक करके अपनी साइट पर लगाते हैं तो आपकी साइट पर आने वाले हर विजिटर के लिए वह विडियो ओरिजनल साइट से डाउनलोड होता है। डाउनलोड की इस प्रक्रिया में उसकी बैंडविड्थ खर्च होती है, जबकि आप अपनी बैंडविड्थ बचा लेते हैं।
- यह किसी अनजान व्यक्ति की जेब काटने जैसा है। हमेशा अपनी बैंडविड्थ ही खर्च करें, दूसरों की नहीं।

कुछ और साइबर क्राइम
- साइबर स्क्वैटिंग : किसी मशहूर ब्रैंड, कंपनी, संगठन, इंसान आदि के नाम से जुड़ा डोमेन नेम अनधिकृत रूप से अपने नाम से बुक करवा लेना।
- ऑनलाइन मानहानि : अपने ब्लॉग, वेबसाइट, सोशल नेटवकिर्ंग ठिकाने या दूसरे इंटरनेट ठिकाने पर किसी के बारे में अपमानजनक या अश्लील टिप्पणी करना।
- कारोबारी डेटा : किसी ग्राहक द्वारा मुहैया कराए जाने वाले गोपनीय कारोबारी डेटा की कॉपी बनाकर अपने पास रखना।
- वेबसाइट, डोमेन नेम पर कब्जा : भारत में कई वेब डिवेलपमेंट कंपनियां ऐसा करने की दोषी पाई गई हैं। अपने ग्राहकों के लिए डोमेन नेम बुक कराते, वेब होस्टिंग स्पेस लेते और इंटरनेट सेवा मुहैया कराते समय वे उनका सबसे खास यूजरनेम और पासवर्ड अपने कब्जे में रख लेते हैं और फिर उसी के दम पर ग्राहकों को तंग करते हैं।
- डिजाइन की चोरी : किसी वेबसाइट, ब्लॉग, ई-बुक आदि की बिना मंजूरी हू-ब-हू नकल कर लेना। किसी की टेंप्लेट को अनधिकृत रूप से इस्तेमाल कर लेना।

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JUGAL PATEL [CEO Eguru InfoTech PVT LTD- GUJARAT - MAIL ♠ eguru24x7@gmail.com

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[ अभी Under Construction है फिर भी प्राथमिक जानकारी और उद्देश्य मील जाएँगे ! जरूरत है फंडिंग की और निवेशको को --- जो शेरिंग प्रोफिट पार्टनर और समाज सेवक दोनों बनेंगे ! ]

Tuesday, November 27, 2012

Top 5 Best Free Windows Virtual Desktop Software

Presented to you from ▐ http://www.facebook.com/egyan4u

Top 5 Best Free Windows Virtual Desktop Software

By: www.eguru24x7.wordpress.com

 

Many people have become accustomed to multitasking and doing it on the computer can be quite challenging if you have a lot of several programs open and not enough screen space to accommodate all of them. Fortunately, the emergence of virtual desktops has changed all that. With virtual desktops, you now have the capability to create multiple versions of your desktop where you can run different programs and switch easily among them. For your convenience, we have reviewed and prepared a list of FREE Top 7 Windows Virtual Desktop Software.

1. Dexpot

A Free virtual desktop software for windows that allow up to 20 possible desktops with a well-organized interface that will make switching among desktops easier and hassle-free. You can configure each virtual desktop according to your need, such as web surfing and email on desktop 1, office programs on #2 and so on.

2. GiMeSpace Free Edition

A small and simple virtual desktop manager for Windows XP or later versions that will allow you to expand your desktop without limits and add more monitors to your computer. It is a simple and effective way to create the desktop space you need.

3. Virtual Dimension

Another free virtual Desktop manager with a more minimalist and straightforward approach. It is easy to install, configure and use with a simple and user-friendly interface.

4. 360Desktop

360desktop will give you an unlimited desktop space and transforms your standard windows desktop into a 360-degree panoramic workspace. It also has a windows taskbar icon that provides a context menu for customizing options. You also get an attractive desktop with custom widgets.

5. VirtuaWin

VirtuaWin is another Windows virtual desktop manager that is free to use and has a simple interface; it provides several customizations for navigation, organization and various workarounds;

Wednesday, October 10, 2012

फ्री वीडियो चैटिंग - How to Use SKYPE ?

स्‍काइप से कैसे करें फ्री वीडियो चैटिंग

skype2

वॉयस ओवर आईपी यानी ऐसे प्रोग्राम जिनकी मदद से आप अपने दोस्‍तों और फैमली मेंमबर से कहीं भी मैसेज के द्वारा बात कर सकते हैं। इस तरह के कई प्रोग्राम इंटरनेट पर मौजूद है जिनमें से स्‍काइपे पूरी दुनिया में सबसे ज्‍यादा पॉपुलर वॉयस ओवर प्रोग्राम है।

स्‍काइप की मदद से आप अपने दोस्‍तों और फैमली मेंबर से कभी भी कहीं भी वीडियो चैटिंग के साथ मैसेज चैटिंग कर सकते हैं। अगर आप पहली बार स्‍काइप का प्रयोग कर रहें हैं तो इसके लिए आपको कुछ स्‍टेप फॉलो करनी पड़ेगी।

 

 

स्‍टेप 1

सबसे पहले अपने पीसी में स्‍काइप को डाउनलोड कर लें, स्‍काइप डाउनलोड करने के लिए फ्री और प्रीमियम दोनों वर्जन उपलब्‍ध है जिसमें से पर्सनली यूज के लिए फ्री वर्जन डाउनलोड कर लें।

स्‍टेप 2
स्‍काइप डाउनलोड होने के बाद उसे ओपेन करें और कांटेक्‍ट लिस्‍ट में जाएं।

स्‍टेप 3
कांटेक्‍ट लिस्‍ट से जाकर अगर आप अपने दोस्‍त का इमेल एड्रैस जानते हैं तो उसे एड कर के क्लिक कर दें,

स्‍टेप 4
अब दूसरी तरफ से अपने दोस्‍त को स्‍काइप में ऑनलाइन आने को कहें। अगर उसके पीसी में स्‍काइप नहीं हैं तो जिस तरह आपने अपने पीसी में स्‍काइप  डाउनलोड किया है वैसे ही उसके पीसी में करने को कहें।

स्‍टेप 5
जब दोनों पीसी में स्‍काइप डाउनलोड हो जाए तो कांटेक्‍ट में जाकर अपने दोस्‍त को वीडियो कालिंग करें।

स्‍टपे 6
वीडियो कालिंग करने के बाद जैसे ही आपका दोस्‍त कॉल रिसीव करेगा पीसी मे लगा वैब कैम अपने आप ऑन हो जाएगा।

स्‍टेप 7

अब आप वीडियो के साथ साथ मैसेज चैटिंग भी कर सकते हैं।

नोट: अगर आप बेहतर वीडियो चैटिंग करना चाहते हैं तो फास्‍ट इंटरनेट कनेक्‍शन का प्रयोग करें।

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