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Saturday, December 15, 2012

प्रकृति में 108 की विविध अभिव्यंजना किस प्रकार की है

हमारे हिन्दू धर्म के किसी भी शुभ कार्य, पूजा , अथवा अध्यात्मिक व्यक्ति के नाम के पूर्व ""श्री श्री 108 "" लगाया जाता है...!
लेकिन क्या सच में आप जानते हैं कि.... हमारे हिन्दू धर्म तथा ब्रह्माण्ड में 108 अंक का क्या महत्व है....?????
Photo: साभार : आस्था एवं संस्कारहमारे हिन्दू धर्म के किसी भी शुभ कार्य, पूजा , अथवा अध्यात्मिक व्यक्ति के नाम के पूर्व ""श्री श्री 108 "" लगाया जाता है...!लेकिन क्या सच में आप जानते हैं कि.... हमारे हिन्दू धर्म तथा ब्रह्माण्ड में 108 अंक का क्या महत्व है....?????दरअसल.... वेदान्त में एक ""मात्रकविहीन सार्वभौमिक ध्रुवांक 108 "" काउल्लेख मिलता है.... जिसका अविष्कार हजारों वर्षों पूर्व हमारेऋषि-मुनियों (वैज्ञानिकों) ने किया था lआपको समझाने में सुविधा के लिए मैं मान लेता हूँ कि............ 108 = ॐ (जो पूर्णता का द्योतक है).अब आप देखें .........प्रकृति में 108 की विविध अभिव्यंजना किस प्रकार की है :1. सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी/सूर्य का व्यास = 108 = 1 ॐ150,000,000 km/1,391,000 km = 108 (पृथ्वी और सूर्य के बीच 108 सूर्य सजाये जा सकते हैं)2. सूर्य का व्यास/ पृथ्वी का व्यास = 108 = 1 ॐ1,391,000 km/12,742 km = 108 = 1 ॐसूर्य के व्यास पर 108 पृथ्वियां सजाई सा सकती हैं .3. पृथ्वी और चन्द्र के बीच की दूरी/चन्द्र का व्यास = 108 = 1 ॐ384403 km/3474.20 km = 108 = 1 ॐपृथ्वी और चन्द्र के बीच 108 चन्द्रमा आ सकते हैं .4. मनुष्य की उम्र 108 वर्षों (1ॐ वर्ष) में पूर्णता प्राप्त करती है .क्योंकि... वैदिक ज्योतिष के अनुसार.... मनुष्य को अपने जीवन काल मेंविभिन्न ग्रहों की 108 वर्षों की अष्टोत्तरी महादशा से गुजरना पड़ता है .5. एक शांत, स्वस्थ और प्रसन्न वयस्क व्यक्ति 200 ॐ श्वास लेकर एक दिन पूरा करता है .1 मिनट में 15 श्वास >> 12 घंटों में 10800 श्वास >> दिनभर में 100 ॐ श्वास, वैसे ही रातभर में 100 ॐ श्वास6. एक शांत, स्वस्थ और प्रसन्न वयस्क व्यक्ति एक मुहुर्त में 4 ॐ ह्रदय की धड़कन पूरी करता है .1 मिनट में 72 धड़कन >> 6 मिनट में 432 धडकनें >> 1 मुहूर्त में 4 ॐ धडकनें ( 6 मिनट = 1 मुहूर्त)7. सभी 9 ग्रह (वैदिक ज्योतिष में परिभाषित) भचक्र एक चक्र पूरा करते समय 12 राशियों से होकर गुजरते हैं और 12 x 9 = 108 = 1 ॐ8. सभी 9 ग्रह भचक्र का एक चक्कर पूरा करते समय 27 नक्षत्रों को पार करतेहैं... और, प्रत्येक नक्षत्र के चार चरण होते हैं और 27 x 4 = 108 = 1 ॐ9. एक सौर दिन 200 ॐ विपल समय में पूरा होता है. (1 विपल = 2.5 सेकेण्ड)1 सौर दिन (24 घंटे) = 1 अहोरात्र = 60 घटी = 3600 पल = 21600 विपल = 200 x 108 = 200 ॐ विपल@@@@ उसी तरह ..... 108 का आध्यात्मिक अर्थ भी काफी गूढ़ है..... और,1 ..... सूचित करता है ब्रह्म की अद्वितीयता/एकत्व/पूर्णता को0 ......... सूचित करता है वह शून्य की अवस्था को जो विश्व की अनुपस्थिति में उत्पन्न हुई होती8 ......... सूचित करता है उस विश्व की अनंतता को जिसका अविर्भाव उस शून्य में ब्रह्म की अनंत अभिव्यक्तियों से हुआ है .अतः ब्रह्म, शून्यता और अनंत विश्व के संयोग को ही 108 द्वारा सूचित किया गया है .इस तरह हम कह सकते हैं कि.....जिस प्रकार ब्रह्म की शाब्दिक अभिव्यंजनाप्रणव ( अ + उ + म् ) है...... और, नादीय अभिव्यंजना ॐ की ध्वनि है.....ठीक उसी उसी प्रकार ब्रह्म की ""गाणितिक अभिव्यंजना 108 "" है.


दरअसल.... वेदान्त में एक ""मात्रकविहीन सार्वभौमिक ध्रुवांक 108 "" का
उल्लेख मिलता है.... जिसका अविष्कार हजारों वर्षों पूर्व हमारे
ऋषि-मुनियों (वैज्ञानिकों) ने किया था l

आपको समझाने में सुविधा के लिए मैं मान लेता हूँ कि............ 108 = ॐ (जो पूर्णता का द्योतक है).

अब आप देखें .........प्रकृति में 108 की विविध अभिव्यंजना किस प्रकार की है :

1. सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी/सूर्य का व्यास = 108 = 1 ॐ

150,000,000 km/1,391,000 km = 108 (पृथ्वी और सूर्य के बीच 108 सूर्य सजाये जा सकते हैं)

2. सूर्य का व्यास/ पृथ्वी का व्यास = 108 = 1 ॐ

1,391,000 km/12,742 km = 108 = 1 ॐ
सूर्य के व्यास पर 108 पृथ्वियां सजाई सा सकती हैं .

3. पृथ्वी और चन्द्र के बीच की दूरी/चन्द्र का व्यास = 108 = 1 ॐ
384403 km/3474.20 km = 108 = 1 ॐ
पृथ्वी और चन्द्र के बीच 108 चन्द्रमा आ सकते हैं .

4. मनुष्य की उम्र 108 वर्षों (1ॐ वर्ष) में पूर्णता प्राप्त करती है .

क्योंकि... वैदिक ज्योतिष के अनुसार.... मनुष्य को अपने जीवन काल में
विभिन्न ग्रहों की 108 वर्षों की अष्टोत्तरी महादशा से गुजरना पड़ता है .

5. एक शांत, स्वस्थ और प्रसन्न वयस्क व्यक्ति 200 ॐ श्वास लेकर एक दिन पूरा करता है .

1 मिनट में 15 श्वास >> 12 घंटों में 10800 श्वास >> दिनभर में 100 ॐ श्वास, वैसे ही रातभर में 100 ॐ श्वास

6. एक शांत, स्वस्थ और प्रसन्न वयस्क व्यक्ति एक मुहुर्त में 4 ॐ ह्रदय की धड़कन पूरी करता है .

1 मिनट में 72 धड़कन >> 6 मिनट में 432 धडकनें >> 1 मुहूर्त में 4 ॐ धडकनें ( 6 मिनट = 1 मुहूर्त)

7. सभी 9 ग्रह (वैदिक ज्योतिष में परिभाषित) भचक्र एक चक्र पूरा करते समय 12 राशियों से होकर गुजरते हैं और 12 x 9 = 108 = 1 ॐ


8. सभी 9 ग्रह भचक्र का एक चक्कर पूरा करते समय 27 नक्षत्रों को पार करते हैं... और, प्रत्येक नक्षत्र के चार चरण होते हैं और 27 x 4 = 108 = 1 ॐ

9. एक सौर दिन 200 ॐ विपल समय में पूरा होता है. (1 विपल = 2.5 सेकेण्ड)

1 सौर दिन (24 घंटे) = 1 अहोरात्र = 60 घटी = 3600 पल = 21600 विपल = 200 x 108 = 200 ॐ विपल
@@@@ उसी तरह ..... 108 का आध्यात्मिक अर्थ भी काफी गूढ़ है..... और,

1 ..... सूचित करता है ब्रह्म की अद्वितीयता/एकत्व/पूर्णता को

0 ......... सूचित करता है वह शून्य की अवस्था को जो विश्व की अनुपस्थिति में उत्पन्न हुई होती

8 ......... सूचित करता है उस विश्व की अनंतता को जिसका अविर्भाव उस शून्य में ब्रह्म की अनंत अभिव्यक्तियों से हुआ है .
अतः ब्रह्म, शून्यता और अनंत विश्व के संयोग को ही 108 द्वारा सूचित किया गया है .


इस तरह हम कह सकते हैं कि.....जिस प्रकार ब्रह्म की शाब्दिक अभिव्यंजना प्रणव ( अ + उ + म् ) है...... और, नादीय अभिव्यंजना ॐ की ध्वनि है.....ठीक उसी उसी प्रकार ब्रह्म की ""गाणितिक अभिव्यंजना 108 "" है.

Thursday, December 13, 2012

भारत के लिये क्‍यों महत्‍वपूर्ण है सर क्रीक ?

भारत के लिये क्‍यों महत्‍वपूर्ण है सर क्रीक ?

 

Sir Creek
गुजरात के कच्‍छ की समुद्री सीमा पर स्थित 650 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र सर क्रीक अचानक सुर्खियों में आ गया है। इस मुद्दे को उठाया है गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी ने और दबाने की कोशिश कर रही है केंद्र की सत्‍ताधारी पार्टी कांग्रेस। देश की सुरक्षा से जुड़े इस संवेदनशील मामले की गहराई में जाने से पहले हम आपको सैर कराना चाहेंगे सरक्रीक की।

 

आये दिन अखबारों में आप पाकिस्‍तानी रेंजरों द्वारा भारतीय मछुवारों को पकड़ने की और भारतीय रेंजरों द्वारा पाक मछुवारों के पकड़े जाने की खबरें पढ़ते रहते होंगे। असल में दोनों देशों के गरीब मछुवारे भी आज तक इस समुद्री सीमा को लेकर कंफ्यूज्‍ड हैं। सर क्रीक 650 वर्ग किलोमीटर का भारत का वो समुद्री इलाका है, जिस पर पाकिस्‍तान अपना दावा करता है।

इतिहास के पन्‍ने पलटें तो भारत में ईस्‍ट इंडिया कंपनी के शासन के दौरान चार्ल्‍स नैपियर ने 1842 में सिंध पर जीत हासिल की और उसे बंबई राज्‍य को सौंप दिया। उसके बाद सिंध में शासन कर रही सरकार ने सिंध और बंबई के बीच सीमारेखा खींचने का निर्णय लिया, जो कच्‍छ से गुजरती थी। उस निर्णय के अंतर्गत सरक्रीक खाड़ी को सिंध प्रांत में दर्शाया गया।

जबकि दिल्‍ली में शासन कर रही अंग्रेज सरकार के नक्‍शे में इसे भारत में दर्शाया गया। विवाद हुआ और फाइलों में दब गया। लेकिन स्‍वतंत्रता के बाद जब दोनों देशों के बीच बंटवारा हुआ तो पाकिस्‍तान ने सरक्रीक खाड़ी पर अपना मालिकाना हक जता दिया। इस पर भारत ने एक प्रस्‍ताव तैयार किया जिसमें समुद्र में कच्‍छ के एक सिरे से दूसरे सिरे तक सीधी रेखा खींची और कहा कि इसे ही सीमारेखा मान लेनी चाहिये। यह प्रस्‍ताव पाकिस्‍तान ने ठुकरा दिया, क्‍योंकि इसमें 90 फीसदी हिस्‍सा भारत को मिल रहा था। तब से लेकर आज तक दोनों देशों के बीच इस खाड़ी के मालिकाना हक को लेकर विवाद चल रहा है।

केंद्र में हाल ही में क्‍या हुआ

केंद्र सरकार ने हाल ही में सर क्रीक पर पाकिस्‍तान से समझौता करने पर सहमति बना ली है। ऐसी खबर आयी है कि हाल ही में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस पर डील फाइनल करने की चर्चा की। रक्षामंत्री एके एंटनी और तत्‍कालीन वित्‍त मंत्री प्रणब मुखर्जी भी इस पर राजी हो गये। माना जा रहा है कि यूपीए इस मामले को जल्‍द ही पाकिस्‍तान के सामने रख सकती है।

नरेंद्र मोदी क्‍यों कर रहे हैं विरोध

यूपीए की इस योजना के बारे में पता चलने पर नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा। पत्र में यह मांग की है कि सरक्रीक का 10 फीसदी हिस्‍सा पाकिस्‍तान को दे दिया जाये और बाकी भारत में रहने दिया जाये। यदि इससे कम पर समझौता हुआ तो देश की सुरक्षा में सेंध लग सकती है। उन्‍होंने कहा कि ऐसा होने पर पूरा देश भले ही खुद को सुरक्षित महसूस करे, लेकिन कच्‍छ सुरक्षित कभी नहीं रह पायेगा। मोदी ने कहा कि सरक्रीक में देश की प्राकृतिक संपदा का भंडार है उसे ऐसे पाकिस्‍तान को नहीं दे देनी चाहिये। आर्थिक दृष्टि से देखें तो इस क्षेत्र में भारी मात्रा में कच्‍चा तेल अथवा गैस होने की संभावना है, जो भारतीय अर्थ व्‍यवस्‍था के लिये सकारात्‍मक साबित हो सकता है।

सरक्रीक से जुड़े कुछ अन्‍य तथ्‍य

- सन 2000 में पाकिस्‍तान ने सरक्रीक पर भारी संख्‍या में सैनिकों को तैनात किया था। यानी वहां भी कारगिल जैसे युद्ध की तैयारी थी।
- 1965 के बाद ब्रिटिश पीएम हेरोल्‍ड विल्‍सन के हस्‍तक्षेप के बाद अदालत ने 1968 में फैसला सुनाया था, जिसके अनुसार पाकिस्‍तान को 9000 वर्ग किलोमीटर का मात्र 10 फीसदी हिस्‍सा मिला था।
- पाकिस्‍तान ने सिंध और कच्‍छ के बीच हुए एग्रीमेंट की कुछ तस्‍वीरों के आधार पर क्रीक को सिंध का भाग घोषित कर दिया और एक रेखा खींची जिसे ग्रीन लाइन बाउंड्री कहा।
- भारत ने इसे मानने से इंकार कर दिया। भारत ने कहा कि अंतर्राष्‍ट्रीय कानून के मुताबिक 1924 के आधार पर लगाये गये स्‍तंभों के आधार पर अपना दावा पेश किया। पाकिस्‍तान ने उसे यह कहकर मानने से इंकार कर दिया कि इस सीमा से नाव पार नहीं की जा सकती है, जबकि इस सीमा को आसानी से पार किया जा सकता है।
- 1999 में भारतीय वायुसेना ने सरहद के पार से आये एक पाकिस्‍तानी विमान को ध्‍वस्‍त कर दिया था। बताया जाता है कि यह विमान भारतीय सीमा में सर क्रीक की स्थिति को टोहने के लिये आया था। यह घटना कारगिल युद्ध के कुछ महीनों बाद ही हुई थी।

कुल मिलाकर देखा जाये तो केंद्र को इस मामले में जल्‍दबाजी नहीं करनी चाहिये। यदि नरेंद्र मोदी ने इस पर सवाल उठाये हैं, तो चुनाव के बाद इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए सुलझाने के ऐसे प्रयास करने चाहिये, जो भारत के हक में हों।

गांधी और कैलनबैक के बीच लिखे पत्र

लंदन में नीलम होंगे गांधी और कैलनबैक के बीच लिखे पत्र

 

लंदन में नीलम होंगे गांधी और कैलनबैक के बीच लिखे पत्र
गुरूवार, जून 14, 2012, 13:35 [IST]

mahatma gandhi
लंदन। दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी द्वारा गुजारे गए समय से जुड़े पत्र, तस्वीरें और दस्तावेज लंदन में 10 जुलाई को नीलाम होने जा रहे हैं। आपको बता दें कि इनमें बापू के आर्किटेक्ट हरमन कैलनबैक के विवादित संबंधों से जुड़े दस्तावेज भी शामिल हैं। नीलाम घर सॉथबी को गांधी से जुड़ी इस सामग्री से 5 लाख से 7 लाख पौंड मिलने की उम्मीद है।

पत्रों में से एक में गांधी ने 25 मार्च 1945 को कालबाख के बारे में लिखा है, ऐसे वक्त में जब सभी ने मेरा साथ छोड़ दिया था वह अक्सर मुझसे कहा करते थे कि मैं उन्हें हमेशा अपने साथ चलने वाले दोस्त की तरह पाएंगे, अगर जरूरत हुई तो, सच की तलाश में धरती के अंत तक जाएंगे।

सॉथबी ने कहा है कि इस सामग्री में दो पुरुषों के बीच दोस्ती के बारे में काफी जानकारियां हैं। यह गांधी जी की जीवनी के लिए अहम दस्तावेज हैं। कैलनबैक की दक्षिण अफ्रीका में 1904 में गांधी से मुलाकात हुई थी। इसके बाद वे दोनों हमेशा संपर्क में बने रहे।

ज्ञात हो कि गांधी जी के भारत लौटने के बाद भी उनकी दोस्ती कायम रही। 1910 में कैलनबैक ने जोहेनसबर्ग के पास 1100 एकड़ जमीन खरीदी और गांधी जी को दे दी। इस जमीन पर खेती का कामकाज गांधी जी और कैलनबैक मिलकर देखते थे।

सॉथबी ने इस विषय में जानकारी देते हुए बताया कि नीलामी के लिए रखी जाने वाली सामग्री में न केवल जमीन की खरीद से संबंधित दस्तावेज हैं, बल्कि वह दस्तावेज भी शामिल हैं, जो बताते हैं कि कैसे दोनों लोगों ने जमीन के लिए फलों के पेड़ खरीदे। वहां सिंचाई की व्यवस्था की। जमीन पर खेती को लेकर उनका पड़ोसियों से बहस होने का जिक्र भी इनमें है।

इन दस्तावेजों को ध्यान से देखने से पता चलता है कि इसमें गांधीजी के बड़े बेटे हरिलाल, दूसरे पुत्र मणिलाल और तीसरे पुत्र रामदास के बारे में भी जानकारी है। सॉथबी के मुताबिक गांधीजी के पारिवारिक सदस्यों और उनके करीबी सहयोगियों की ओर से लिखे गए इन पत्रों में गांधी की निजी जिंदगी के बारे में विस्तृत जानकारी है।