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Friday, September 14, 2012

इंडिया फर्स्ट ही सेक्यूलरिज्म हैः नरेंद्र मोदी on GOOGLE+ LIVE Review


इंडिया फर्स्ट ही सेक्यूलरिज्म हैः नरेंद्र मोदी
Narendra Modi on GOOGLE+ LIVE Review
अजय देवगन के साथ किया गूगल पर साक्षात्कार मोदी जी के साथ 
शो शुरु करते हुए अजय देवगन ने कहा, 'देर से शुरु करने के लिए हम माफी चाहते हैं। हमे बताया गया है कि ट्रैफिक की वजह से पूरा सिस्टम ही क्रैश हो गया और दोबारा शुरु करने में एक घंटे का वक्त लग गया।'

नरेंद्र मोदी ने कहा, 'ट्रैफिक बढ़ गया और लाखों की तादाद में लोग आ गए जिस कारण सिस्टम क्रैश हो गया। मैं गूगल प्लस का आभारी हूं उसने मुझे आपसे बात करने का मौका दिया। मैं देख रहा हूं कि वो किस तरह से ट्रैफिक को मैनेज कर रहे थे। इतनी दिक्कत तो सड़क पर खड़े ट्रैफिक पुलिस कर्मियों को भी नहीं होती होगी जितनी दिक्कत ट्रैफिक क्लियर करने में इन्हें हुई।'

पहला सवाल गुड़गांव के पवन ने पूछा उन्होंने उन्होंने युवा युग की बात उठाते हुए कहा कि ऐसा लग रहा है कि भारत चीन से पीछे छूट गया है? आपकी राय क्या है?

नरेंद्र मोदीः देश के करोड़ों युवाओं के मन में ये पीड़ा है कि हमारा देश आगे क्यों नहीं बढ़ रहा है। मैं समझता हूं कि यह दर्द अपने आप में बड़ी शक्ति है। 21वीं सदी एशिया की है और क्या वो चीन की सदी बनेगी या भारत की इस पर बहस हो रही है। 21वीं सदी ज्ञान की सदी है और मैं मन से मानता हूं कि इस सदी में भारत नेतृत्व करेगा और विश्व कल्याण के मार्ग पर जाएगा। ये बात सही है कि हमारा देश विश्व का सबसे युवा देश है। 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम है। यदि हम युवाओं की स्किल डेवलवमेंट करेंगे तो हम सही दिशा में जा सकेंगे। यह बात सही है कि चीन ने स्किल डेवलवमेंट पर बहुत काम किया है लेकिन गुजरात में हमने पूरा फोकस स्किल डेवलपमेंट पर ही किया है और इसके कारण हमारे पास एक वर्कफोर्स तैयार हो रहा है। मुझे विश्वास है कि भारत विश्व गुरु बनेगा और भारत की युवा शक्ति विश्व को लीड करेगी।

लंदन से एक दर्शक ने मोदी से सेक्यूलरिज्म की परिभाषा पूछी तो उन्होंने जवाब दिया, 'आपने बड़ा सनातन सवाल पूछा है। सेक्यूलरिज्म पर हमारे देश में खूब बहस होती है। डिक्शनरी में सेक्यूलरिज्म की जो परिभाषा है वो हिंदुस्तान में कहीं नहीं है। मेरे लिए सेक्यूलरिज्म के मायने इंडिया फर्स्ट है। भारत सबसे पहले जिसके मन में हैं वो सबसे बड़ा सेक्यूलर है। वोट बैंक की राजनीति ने हमारे सेक्यूलरिज्म को बहुत खोखला कर दिया है। जिस दिन वोट बैंक की राजनीति समाप्त हो जाएगी उस दिन विश्व भारत के सेक्यूलरिज्म को सलाम करेगा।'

बेंगलुरु से एक दर्शक ने सवाल किया, 'युवा राजनीति में नहीं आना चाह रहा है, अगर वो आना भी चाहता है तो परिवार नहीं आने देता, इस पर आपकी राय क्या है?

देखिये राजनीति अपने आप में खराब नहीं है, यही देखा जाये तो भगवान कृष्ण जो करते थे वो सब राजनीति ही थी। भगवान राम जो करते थे वो भी राजनीति ही थी। भगवान बुद्ध राजपरिवार में ही पैदा हुए थे। महात्मा गांधी देश को जगाने के लिए राजनीति में ही आए थे। राजनीति बुरी चीज नहीं है। लेकिन दुर्भाग्य से हमारे देश में आजादी की ललक को जिंदा नहीं रखा जा सका।

नरेंद्र मोदी ने जवाब दिया, 'देश के युवाओं को अगर स्वराज के निर्माण में हिस्सेदार बनाया होता तो ये दूरी नहीं होती। आज विशेष प्रयास करके राजनीति में आने का प्रयास करना होता है वो नहीं होता। आज से 40 साल पहले देश का जो नेतृत्व उभर कर आया वो या तो स्वतंत्रता संग्रामी थे या फिर कला से जुड़े लोग थे लेकिन धीरे धीरे परिवारों से, जातियों से , बंदूक की नोक से नेता पैदा होने लगे। यह बुराइयां आई हैं और इन्हें दूर करने के लिए युवाओं को नेतृत्व में आना ही होगा। मैं स्वयं बहुत सी सामान्य परिवार से आता हूं। मेरे परिवार में कोई राजनीति का र भी नहीं जानता था लेकिन मैं हिम्मत के साथ समाज के लिए कुछ करने के लिए निकल पड़ा और काम कर रहा हूं। राजनीति बहुत ही निर्णायक पोजीशन पर होती है। मैं युवाओं को निमंत्रण देता हूं कि राजनीति में आओ। अनुभव से कहता हूं कि कुछ बनने के सपने देखने के लिए राजनीति में नहीं आना चाहिए बल्कि कुछ करने के मकसद से राजनीति में आना चाहिए। आप कुछ करने के उद्देश्य से आएंगे तो कुछ बन भी जाएंगे। राजनीति मक्खन पर लकीर करने वाला खेल नहीं हैं यह पत्थर पर लकीर करने वाला खेल है और पत्थर पर लकीर देश के युवा खीचेंगे।


Sunday, September 9, 2012

मनमोहन सिंह को इतना फायदा वे दस करोड़ के आदमी हो गये हैं।


प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। उनके राज में लाखों करोड़ के घपले घोटाले सामने आ रहे हैं। उनके राज में मंहगाई नित नये रिकार्ड तोड़ रही है। लेकिन यह रिकार्डतोड़ मंहगाई मनमोहन सिंह के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है।

उनकी संपत्तियों का इस साल का जो व्यौरा सामने आया है उसमें कहा गया है कि उनकी संपत्तियों की कीमत बढ़कर दोगुनी हो गयी है। सब मंहगाई का परिणाम है। उनके पास जो अचल संपत्तियां हैं, मंहगाई के कारण उनकी कीमत बढ़ रही है इसलिए कम से कम इस मंहगाई से मनमोहन सिंह को इतना फायदा हुआ है कि अपनी अचल संपत्तियों की बढ़ी कीमतों के कारण वे दस करोड़ के आदमी हो गये हैं।

मनमोहन सिंह की संपत्ति पिछले साल की तुलना में दोगुना बढ़ कर करीब 10.73 करोड़ की रूपये हो गई है। उनके कई मंत्रिमंडलीय सहयोगी उनसे कहीं अधिक अमीर हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट पर मंत्रियों की संपत्ति की अद्यतन सूची के अनुसार, अमीर कैबिनेट मंत्रियों में जहां प्रफुल पटेल की संपत्ति 52 करोड़ रूपये की है वहीं कपिल सिब्बल के पास 45 करोड़ की संपत्ति है। शरद पवार की संपत्ति 22 करोड़ रूपये की है तो कैबिनेट मंत्रियों की सूची में संपत्ति के नाम पर रक्षा मंत्री ए के एंटनी का नाम सबसे नीचे है। उनकी संपत्ति करीब 55 लाख रूपये है।

मनमोहन सिंह ने अपने रिहायशी संपत्ति, बैंक में जमा राशि और एक मारूति 800 कार को अपनी संपत्ति के तौर पर दर्शाया है। सिंह के चंडीगढ़ और दिल्ली स्थित दो फ्लैटों की कीमत 7.27 करोड़ रूपये है वहीं स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के विभिन्न खातों में उनकी सावधि जमा राशि और निवेशों की राशि करीब 3.46 करोड़ रूपये है। उन्होंने अपनी संपत्ति 10,73,88,730.81 रूपये (करीब 19.73 करोड़ रूपये) की घोषित की है।

पिछले साल प्रधानमंत्री ने अपनी कुल संपत्ति 5.11 करोड़ रूपये की घोषित की थी। तब उनके चंडीगढ़ और वसंत कुंज स्थित फ्लैटों की कीमत 1.78 करोड़ रूपये थी और उनके पास 2.75 लाख रूपये मूल्य के 150.80 ग्राम सोने के गहने थे। प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि सिंह की संपत्ति तो वही है लेकिन सरकार की मंजूरी प्राप्त एक आकलनकर्ता द्वारा किए गए आकलन के अनुसार, उस संपत्ति का मूल्य बढ़ गया है। सिंह की मारूति 800 की कीमत केवल 21,033 रूपये दर्शाई गई है। वह 150.80 ग्राम सोने के गहनों के मालिक भी हैं लेकिन इनकी कीमत उनकी संपत्ति की घोषणा और देनदारी नहीं दर्शाई गई है। प्रधानमंत्री का असम के दिसपुर में एक बैंक खाता भी है जिसमें उनके मात्र 6,515.78 रूपये जमा हैं।

सोनिया गांधी को अध्यक्ष बनाने के लिए 6 दावेदार नेताओं का कत्ल-------

सोनिया गांधी को अध्यक्ष बनाने के लिए 6 दावेदार नेताओं का कत्ल-------

  चर्च द्वारा योजनाबद्ध तरीके से एक फासीवादी इटालियन स्टीफैनो व पाओला माईनों की औलाद एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो उर्फ सोनिया गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाकार गांधी परिवार की विरासत पर कब्जे के साथ ही शहीदों द्वारा 1857 से 1947 तक किए गए संघर्ष व बलिदानों के परिमामस्वारूप भारतीयों के हाथों आई सत्ता को भारतीयों वोले तो हिन्दूओं से छीन कर सीधे चर्च के हाथों तक पहुंचाना।

ये कहानी शुरू होती है राजीब गांधी जी के पढ़ाई के लिए विदेश जाने के साथ ही। जैसे ही राजीब गांधी जी पढ़ाई के लिए लन्दन पहुंचे चर्च ने उन्हें अपने जाल में फंसाने के लिए जाल बुनना शुरू कर दिया। अपने इस जाल को अंजाम तक पहुंचाने के लिए चर्च की निगाह पड़ी लुसियाना इटली में कैथोलिक परिवार में जन्मी व कैथोलिक स्कूल में पढ़ाई कर रही फासीवादी स्टीफैनो व पाओला माईनों की औलाद एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो पर । चर्च ने एंटोनिया को 1964 में Cambridge शहर के The bell education Trust में अंग्रेजी सीखने के नाम पर प्रवेश दिलवाया। राजीब गांधी जी को अपने षडयन्त्र में फांसने के उद्देश्य से चर्च नें 1965 में राजीब गांधी जी की मुलाकात एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो से ग्रीक रैस्तरां में करवाई।
 
1968 में इन्दिरा गांधी जी जो कि पूरी तरह इस विदेशी अंग्रेज से राजीब गांधी जी की शादी के विरूद्ध थीं पर ततकालीन सोवियतसंघ से दबाबा वनवाकर एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो की शादी भोले-भाले राजीब गांधी जी से करवा दी गई। इतिहास गवाह है कि चर्च ने कभी भी विदेशी भूमि पर कब्जा जमाने के लिए संयम का परिचय नहीं दिया ।यहां भी शादी तो हो गई लोकिन चर्च का भारत पर सीधे राज करने का जो षडयन्त्र था उसे अन्जाम तक पहुंचाने के लिए जरूरी था एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो को कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचाना।

1965 में एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो व राजीब गांधी को साथ लाने के एकदम बाद ही चर्च ने जनवरी 1966 में सोवियत संघ के तासकंद में एक मुसलिम के माध्यम से लाल बहादुर शास्त्री जी को जहर देकर मरवा दिया। मतलब चर्च ने भारत पर कब्जे की ओर पहला कदम आगे बढ़ाया।

चर्च के दबाब व प्रभाव के परिमामस्वारूप ही लाल बहादुर शास्त्री जी का पोस्टमार्टम तक नहीं कवाया गया जबकि उनकी विधवा पत्नी ललिता शास्त्री जी लगातार पोस्टमार्टम की मांग करती रहीं ---- आप तो जानते ही हैं कि आज भी भारत में चर्च के आगे किसी की भी नहीं चलती ---- जो भी ,र्चच के मार्ग में आया उसे चर्च ने विना कोई समय गंवाय ठिकाने लगा दिया।


शास्त्री जी के कत्ल के बाद चर्च ने एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो के भारत में 15 वर्ष पूरे होने का इन्तजार शुरू किया क्योंकि 15 वर्ष भारत में नागरिकता के लिए एक आवस्यक शर्त है। साथ ही इस समय में शास्त्री जी की मौत पर उठा बबाल भी ठंडा हो गया। इसके साथ ही चर्च ने अपने अगले सिकार की खोज जारी रखी।

भारत पर कब्जे की चर्च की राह में सबसे बड़ी रूकाबट बनकर उभरे प्रखर देशभक्त संजय गांधी जी।

23 जून 1980 को सफदरगंज हबाई अड्डे के पास संजय गांधी जी को चर्च ने एक विमान दुर्घटना में कत्ल करवा दिया। सारे देश में शोर मचा दिया कि इन्दिरा गांधी ने अपने बेटे को मरवा दिया । हर जगह गली मुहल्ले चौराहे पर एक ही चर्चा कि इन्दिरा गांधी जी ने कुर्सी के लिए अपने ही बेटे को मरवा दिया। इस देश में चर्च की अपवाह फैलाओ मशीनरी जो कि 1947 से पहले से ही काम कर रही है उसकी देश के हर कोने तक पकड़ है। इसी अपवाह फैलाओ मशीनरी के षडयन्त्र का सिकार होकर भारतीयों ने चर्च के इसारे पर किए जा रहे कत्लों को दुर्धटनायें मानने की बेबकूफी की ।


बैसे भी भारतीय विशेषकर हिन्दु राजनितीक रूप से बेबकूफ हैं ये किसी को भी बताने जताने की अबस्यकता नहीं। जो हिन्दू मुसलमानों व ईसाईयों द्वारा देश के कई हिस्सों से बेदखल कर दिए जाने के बाबजूद आज भी अपने ही हिन्दू भाईयों के हक छीन कर अल्पसंख्यबाद के नाम पर उन्हीं कातिल मुसलमानों व इसाई को देकर इन कातिलों को ताकतबर बनाने पर तुले हों वो मूर्ख नहीं तो और क्या हैं ?


1980 संजय गांधी जी के कत्ल के बाद चर्च ने रूख किया इन्दिरा गांधी जी की ओर जिन्हें 1984 में कत्ल करवा दिया गया।

फिर 21 मई 1991 को राजीब गांधी जी का भी कत्ल करवाकर एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो को कांग्रेस के अध्यक्ष के पद पर पहूंचने का मार्ग साफ होग गया।

लोगों को असलियत पता न चल जाए इसके लिए कुछ दिन नौटंकी करने के बाद एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो उर्फ सोनिया गांधी को 1998 में कांग्रेस के पहले दलित कांग्रेस अध्यक्ष सीता राम केसरी जी को अनमानजनक रूप से हटाकर अध्यक्ष बना दिया गया।

1999 में कांग्रेस के तीन ताकतवर नेताओं सरद पवार, पूर्ण ए संगमा व तारिक अनवर ने कांग्रेस पर चर्च द्वारा विदेशी नेतृत्व थोपने के विरोध में एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो के विरूद्ध क्रांति का विगुल बजा दिया। लेकिन गुलाम मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसियों के सहयोग व भाजपा की मूर्खता के फलस्वारूप चर्च ने इन नेताओं को ठिकाने लगाकर इस क्रांति को दबाने में असफलता हासिल की । इसके वाद चर्च को डर सताने लगा । चर्च को लगा कि माधवराव सिंधिया व राजेश पायलट जैसे जनता से जुड़ें नेता कभी भी कांग्रेस के अध्यक्षपद के लिए दावेदारी पेसकर चर्च के सारे किए कराय पर पानी फेर सकते हैं। इसी समस्या का समाधान करने किए चर्च ने

11 जून 2000 को राजेश पायलट जी को कार दुर्घटना में मरवा दिया व बाद में एक जहाज दुर्घटना का सहारा लेकर माध्वराव सिंधिया जी को भी कत्ल करवा दिया गया। माधवराव सिंधिया
इस तरह अब कांग्रेस में कोई भी ऐसा नेता न बचा जो चर्च की एजेंट एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो उर्फ सोनिया गांधी के लिए खतरा उत्पन्न कर सके। अब आप सोचो जरा कि क्या ये संयोग हो सकता है कि एक विदेशी एजेंट के रास्ते में रूकावट पैदा करने में सक्षम आधा दर्ज लोग अपने आप दुर्घटनाओं का सिकार हो जायें। हमारे विचार में तो ये चर्च द्वारा किए गए कत्ल हैं, अपनी एंजेंट इटालियन ईसाई एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो को ,भारत में स्थापित करने के लिए.......अगर आप अलग राय रखते हैं तो हमें अपनी राय से अबगत जरूर करवाना।

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