Monday, May 7, 2012
इश्क के किस्से नहीं, मैं मुहब्बत के फ़साने लिखता हूँ
इश्क के किस्से नहीं, मैं मुहब्बत के फ़साने लिखता हूँ
जो भी लिखता हूँ, तुझसे मिलने के बहाने लिखता हूँ
तुझे जो दी थी ज़बां हर वक़्त रास आऊँगा
बस उसी ज़बां के वादे निभाने लिखता हूँ
ज़माना चाहे कहे मैं हर वक़्त लिखता ही हूँ
बसमैं कहता हूँ मैं हर वक़्त ज़माने लिखता हूँ
कभी तुझपे अपनी चाहत लुटाने लिखता हूँ
कभी लव्जों से तेरी चाहत कमाने लिखता हूँ
तेरे लव्जों से एक इरशाद पाने लिखता हूँ
जो भी लिखता हूँ, तुझसे मिलने के बहाने लिखता
कभी इश्क ने जुदा किया कभी इश्क ने मिला दिया।
कभी इश्क ने जुदा किया कभी इश्क ने मिला दिया।
कभी इश्क ने हंसा दिया कभी इश्क ने रुला दिया।
पलकों पर जब भी नींद ने रखने चाहे अपने कदम।
नजरों ने तेरी आ के मुझे आहिस्ते से जगा दिया।।
हर रास्ते पर अब तो मुझे मंजिल नजर आने लगी।
तूने हाथ क्या पकडा मेरा हर फासला मिटा दिया।।
जिंदगी कितने रंगों में अब मेरे सामने आने लगी।
बेरंग ख्वाबों में मेरे तूने रंग भरना सीखा दिया।।
कभी इश्क ने जुदा किया कभी इश्क ने मिला दिया।
कभी इश्क ने हंसा दिया कभी इश्क ने रुला दिया।
कभी इश्क ने हंसा दिया कभी इश्क ने रुला दिया।
पलकों पर जब भी नींद ने रखने चाहे अपने कदम।
नजरों ने तेरी आ के मुझे आहिस्ते से जगा दिया।।
हर रास्ते पर अब तो मुझे मंजिल नजर आने लगी।
तूने हाथ क्या पकडा मेरा हर फासला मिटा दिया।।
जिंदगी कितने रंगों में अब मेरे सामने आने लगी।
बेरंग ख्वाबों में मेरे तूने रंग भरना सीखा दिया।।
कभी इश्क ने जुदा किया कभी इश्क ने मिला दिया।
कभी इश्क ने हंसा दिया कभी इश्क ने रुला दिया।
Subscribe to:
Posts (Atom)
